छत्तीसगढ़ की सिकल सेल किट राष्ट्रीय मंच पर, ICMR समिट में होगा प्रदर्शन
Healthbhaskar.com: रायपुर ,18 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के चिकित्सा एवं अनुसंधान क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा विकसित सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किए जाने के लिए चयनित किया गया है। यह किट इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित “इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट में प्रस्तुत की जाएगी, जो 23 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम में आयोजित होने जा रही है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी पहचान के रूप में उभरी है।
सिकल सेल के खिलाफ नई उम्मीद: नवाचार से बदलेगा स्वास्थ्य परिदृश्य
सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर आनुवांशिक बीमारी है, जो विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है। छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल है, जहां यह बीमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में एमआरयू द्वारा विकसित यह डायग्नोस्टिक किट बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह किट विशेष रूप से नवजात शिशुओं में सिकल सेल की शीघ्र पहचान करने, गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल जांच,एवं समय पर उपचार की शुरुआत हो सके ऐसे विकसित किया गया है।
वैज्ञानिकों की टीम का योगदान: समर्पण और अनुसंधान का परिणाम
इस महत्वपूर्ण किट का विकास एमआरयू के वैज्ञानिकों ने किया है जिसमे डॉ. जगन्नाथ पाल, डॉ. योगिता राजपूत और उनकी टीम शामिल है। इस शोध कार्य में एमआरयू की नोडल ऑफिसर डॉ. मंजुला बेक का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य के चिकित्सा संस्थानों में न केवल उपचार, बल्कि उच्च स्तरीय अनुसंधान और नवाचार भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर चयन: शीर्ष 10 तकनीकों में शामिल
इस किट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर की शीर्ष 10 तकनीकों में स्थान मिला है। यह चयन अपने आप में इस नवाचार की गुणवत्ता और उपयोगिता को दर्शाता है। इस सूची में आईआईटी गुवाहाटी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली और टाटा मेमोरियल सेंटर जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं।ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच चयनित होना इस किट की वैज्ञानिक गुणवत्ता और नवाचार क्षमता का प्रमाण है।
पेटेंट और फंडिंग: शोध को मिला संस्थागत समर्थन
इस सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट के लिए 6 फरवरी 2026 को भारतीय पेटेंट के लिए आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक्स्ट्राम्यूरल फंड के अंतर्गत प्रायोजित रही, जिससे शोध कार्य को आवश्यक संसाधन और वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। यह पहल इस बात का संकेत है कि सरकार और अनुसंधान संस्थान मिलकर स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
इंडस्ट्री से जुड़ने का अवसर: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दिशा में कदम
“इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट का उद्देश्य केवल तकनीकों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग से जोड़ना भी है। इस मंच के माध्यम से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा तथा पेटेंट लाइसेंसिंग के अवसर मिलेंगे एवं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और मजबूत होने के आसार देखने को मिलेंगे। एमआरयू की टीम को इस समिट में अपनी किट के साथ उपस्थित रहने और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा, जिससे इस तकनीक के व्यावसायीकरण की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
संस्थान प्रमुखों की प्रतिक्रिया: गर्व और आशा का संदेश
पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय संस्थान के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान में अनुसंधान और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। वहीं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इसे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई दिशा देने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह किट सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के समय पर निदान में अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण?
छत्तीसगढ़ में सिकल सेल एनीमिया की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक है। ऐसे में यह किट ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जांच को आसान बनाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ाएगी और रोग की रोकथाम में सहायक साबित होगी। यह उपलब्धि राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह नवाचार “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों के अनुरूप भी है। यदि इस किट का सफलतापूर्वक व्यावसायीकरण होता है, तो यह देश में ही सस्ती और प्रभावी जांच सुविधा उपलब्ध कराएगा।
