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FMGs को लेकर छत्तीसगढ़ में उठा बड़ा मुद्दा: NMC दिशानिर्देशों के पालन की मांग तेज, CGDF ने सरकार को भेजा पत्र

Healthbhaskar.com: रायपुर, 6 मई 2026। छत्तीसगढ़ में विदेशी चिकित्सा स्नातकों FMGs ( Foreign Medical Graduates) से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने राज्य सरकार के समक्ष एक विस्तृत पत्र प्रस्तुत कर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा जारी नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रक्रियाओं के पालन की मांग की है। यह पत्र राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को संबोधित करते हुए भेजा गया है, जिसमें FMGs के प्रशिक्षण, पंजीयन और इंटर्नशिप से जुड़ी जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। इस पूरे प्रकरण ने न केवल चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में समन्वय की कमी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि नीति और क्रियान्वयन के बीच का अंतर किस प्रकार हजारों युवा डॉक्टरों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

क्या है पूरा मामला?

18 मार्च 2026 को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा FMGs के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इन दिशानिर्देशों में विशेष रूप से कोविड-19 जैसी परिस्थितियों के दौरान ऑनलाइन या हाइब्रिड माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को राहत देने के प्रावधान शामिल किए गए थे। मुख्य बिंदुओं में यह स्पष्ट किया गया कि ऑनलाइन/हाइब्रिड पढ़ाई करने वाले FMGs को अतिरिक्त प्रशिक्षण देकर पात्र माना जा सकता है तथा अलग से इंटर्नशिप अवधि बढ़ाना अनिवार्य नहीं है। विश्वविद्यालयों द्वारा जारी क्षतिपूर्ण पत्र को वैध माना जाएगा। इन निर्देशों का उद्देश्य महामारी के दौरान प्रभावित छात्रों को न्यायसंगत अवसर प्रदान करना था।

जमीनी स्तर पर समस्या: निर्देशों का अनुपालन नहीं

हालांकि, छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने बताया की कि राज्य के कई संस्थान इन दिशानिर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रहे हैं। इसके कारण FMGs को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं, अतिरिक्त शर्तों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अनुसार कुछ संस्थान अतिरिक्त इंटर्नशिप की मांग कर रहे हैं, तथा क्षतिपूर्ण पत्र को मान्यता नहीं दी जा रही है जिस कारण पंजीयन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। इन परिस्थितियों के कारण कई FMGs, जिन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, उन्हें भी कार्य प्रारंभ करने में कठिनाई हो रही है।

FMGs पर प्रभाव: करियर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित

यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव FMGs के करियर और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। वर्षों की पढ़ाई, विदेश में प्रशिक्षण और कठिन परीक्षाओं को पार करने के बाद भी यदि उन्हें अपने ही देश में कार्य करने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।ऐसी अनिश्चितता से मानसिक तनाव बढ़ता है एवं करियर में देरी से आर्थिक नुकसान भी वहन करना पड़ता है।

नीतिगत असमानता: राज्यों के बीच अलग-अलग नियम

डॉ. हीरा सिंह लोधी ,छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष ने अपने पत्र में एक और गंभीर मुद्दा उठाया है,जिसमे देश के विभिन्न राज्यों में FMGs के लिए अलग-अलग नियम लागू होने के कारण इससे एकरूपता का अभाव पैदा हो रहा है और समान योग्यता वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल संवैधानिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन की प्रमुख मांगें

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने राज्य सरकार से निम्न मांगें रखी हैं, जिसमे विश्वविद्यालयों द्वारा जारी वैध क्षतिपूर्ण पत्र को स्वीकार किया जाए। NMC दिशानिर्देशों के अनुसार 1 वर्ष की इंटर्नशिप सुनिश्चित की जाए। अतिरिक्त एवं अनावश्यक शर्तों को तत्काल समाप्त किया जाए। एवं राज्य में एक समान, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया लागू की जाए। फेडरेशन का कहना है कि इन मांगों को पूरा करने से न केवल FMGs को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।

हजारों युवा डॉक्टरों के भविष्य का सवाल है -डॉ.हीरा सिंह लोधी,अध्यक्ष छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा केवल नियमों का नहीं, बल्कि हजारों युवा डॉक्टरों के भविष्य का है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने सरकार से अपील की है कि इस विषय पर संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की जाए। फेडरेशन का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह एक बड़े असंतोष का रूप ले सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर

FMGs देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। यदि उन्हें समय पर अवसर नहीं मिलेगा, तो डॉक्टरों की कमी और बढ़ेगी जिसका सीधा असर मरीजों को उपचार पर पड़ेगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसलिए यह मुद्दा केवल डॉक्टरों का नहीं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। NMC जैसे केंद्रीय निकाय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का राज्यों में समान रूप से पालन होना आवश्यक है।

समाधान की ओर बढ़ने की जरूरत

छत्तीसगढ़ में FMGs से जुड़ा यह मुद्दा स्वास्थ्य नीति, प्रशासनिक समन्वय और युवा डॉक्टरों के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन द्वारा उठाए गए सवाल न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रासंगिक हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और क्या FMGs को उनके अधिकारों के अनुरूप न्याय मिल पाता है या नहीं।

 


 

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