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छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन का अलर्ट: विशेषज्ञ सेवाओं की अनदेखी से बिगड़ रही स्वास्थ्य व्यवस्था

Healthbhaskar.com: रायपुर ,11 फ़रवरी। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने राज्य के शासकीय चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में कार्यरत स्नातकोत्तर चिकित्सकों (MD/MS/Diploma) की वर्तमान ड्यूटी व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। फेडरेशन का कहना है कि प्रदेश के कई अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी मूल विशेषज्ञता से अलग, विशेषकर आपातकालीन (कैजुअल्टी) सेवाओं में नियमित रूप से तैनात किया जा रहा है, जिससे मरीजों को विशिष्ट उपचार से वंचित होना पड़ रहा है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का गलत उपयोग: गंभीर चिंता का विषय

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में अनेक स्थानों पर एमडी/एमएस चिकित्सकों को नियमित रूप से कैजुअल्टी ड्यूटी में लगाया जा रहा है, जबकि आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में एमबीबीएस चिकित्सक उपलब्ध हैं। इससे न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है, बल्कि मरीजों को आवश्यक विशिष्ट चिकित्सा सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा कि राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति इसलिए की थी, ताकि आम जनता को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, एनेस्थीसिया और मेडिसिन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं सहज उपलब्ध हो सकें, लेकिन वर्तमान व्यवस्था इस उद्देश्य के विपरीत है।

मरीजों को हो रही भारी परेशानी

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को या तो लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है तथा विशेषज्ञ सेवाओं का अभाव स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा कम हो सकता है।

विशेषज्ञ दक्षता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने कड़े शब्दों में कहा कि लंबे समय तक विशेषज्ञ डॉक्टरों को उनकी मूल विशेषज्ञता से अलग कार्यों में लगाए जाने से उनकी क्लीनिकल दक्षता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञता आधारित निरंतर अभ्यास नहीं मिलने से चिकित्सा गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जो भविष्य में गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने बताया की विशेषज्ञ डॉक्टरों का प्रशिक्षण वर्षों की मेहनत और संसाधनों से होता है। यदि उनका उपयोग सही तरीके से नहीं किया गया, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ अन्याय होगा।

शासन से फेडरेशन की प्रमुख मांगें

  • आपातकालीन ड्यूटी मुख्य रूप से एमबीबीएस चिकित्सकों से कराई जाए।
  • एमडी/एमएस चिकित्सकों को उनकी संबंधित विशेषज्ञता के विभागों में ही पदस्थ किया जाए।
  • शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • ड्यूटी रोस्टर में पारदर्शिता और विशेषज्ञता आधारित पदस्थापना लागू की जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन का मानना है कि यदि शासन इन मांगों को स्वीकार करता है, तो इससे न केवल सरकारी अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को भी बेहतर, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा। डॉ. लोधी ने कहा कि यह कदम प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा और आम जनता का सरकारी चिकित्सा प्रणाली पर विश्वास और मजबूत करेगा।

सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों का दबाव

प्रदेश में लगातार बढ़ रही आबादी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि MD/MS डॉक्टर अपने संबंधित विभागों में कार्य करें, तो रेफरल की संख्या कम होगी, उपचार की गुणवत्ता सुधरेगी और मृत्यु दर में भी कमी आएगी।

स्वास्थ्य नीति में बदलाव की आवश्यकता

फेडरेशन ने शासन से आग्रह किया है कि राज्य की स्वास्थ्य नीति में विशेषज्ञों की भूमिका को प्राथमिकता देते हुए ड्यूटी सिस्टम में आवश्यक सुधार किए जाएं। इससे प्रदेश के मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

डॉ. हीरा सिंह लोधी का स्पष्ट संदेश

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने शासन से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य विरोध नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना है। शासन यदि सकारात्मक निर्णय लेता है, तो यह लाखों मरीजों के लिए जीवन रक्षक सिद्ध होगा। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 

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