नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की बड़ी पहल, समयमान वेतनमान को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से हुई निर्णायक चर्चा
Healthbhaskar.com: रायपुर, 24 अक्टूबर 2025 राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग संवर्ग से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों में समयमान वेतनमान को लेकर नाराजगी का माहौल है। समयमान वेतनमान (Time Scale Pay) के लाभ से लंबे समय से वंचित नर्सिंग स्टाफ ने आखिरकार अपनी आवाज शासन तक पहुंचाई है। इस मुद्दे पर नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुलाकात की और विभागीय अनियमितताओं को लेकर गहन चर्चा की है।
छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि नर्सिंग कर्मचारियों को उनके सेवा नियमों के अनुसार 5 वर्षों में नर्सिंग सिस्टर या नर्सिंग प्रदर्शक पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए थी। यदि किसी कारणवश पदोन्नति नहीं हो पाती है, तो 10 वर्षों की सेवा पूर्ण होने पर शासन द्वारा समयमान वेतनमान प्रदान किया जाता है,लेकिन अभी तक कई नर्सिंग कर्मियों ने 16 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी करने के बावजूद न तो उन्हें पदोन्नति मिली है और न ही समयमान वेतनमान का लाभ प्राप्त हुआ है।
छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन संघ के सदस्यों ने यह भी बताया कि कुछ नर्सिंग अधिकारी 30 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर चुके हैं, वहीं कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए या सेवा अवधि में ही निधन हो गया है ,परन्तु उन्हें शासन के नियम अनुसार यह वित्तीय लाभ नहीं मिला है। इस संबंध में संघ द्वारा कई बार शासन और प्रशासन स्तर पर पत्राचार किया गया, परन्तु अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पायी है । स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात के दौरान संघ ने अपनी माँगो की विस्तृर्त चर्चा की तथा स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया है की नर्सिंग संवर्ग के साथ न्याय होगा और शीघ्र ही समयमान वेतनमान का समाधान करेंगे।
संघ ने स्वास्थ्य मंत्री के इस आश्वासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि वर्षों से लंबित इस मांग पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। इससे न केवल नर्सिंग समुदाय को राहत मिलेगी बल्कि उन कर्मचारियों का भी मनोबल बढ़ेगा जो लगातार सेवा भाव से मरीजों की देखभाल में जुटे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। उनकी सेवाओं के बिना चिकित्सा व्यवस्था की कल्पना भी संभव नहीं है। इस लंबे इंतजार के बाद अब उम्मीद जगी है कि सरकार उनके हक का निर्णय शीघ्र करेगी।
संघ का कहना है कि यदि इस बार भी कोई निर्णायक आदेश जारी नहीं हुए तो वे आगे की रणनीति तय करने पर विवश होंगे। नर्सिंग स्टाफ की यह लड़ाई केवल वेतनमान की नहीं, बल्कि सम्मान और सेवा के अधिकार की भी है।
