Mon. Apr 13th, 2026

छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों को बड़ी राहत: पीजी अध्ययन अवकाश अब 3 साल

Healthbhaskar.com: रायपुर,07 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सेवारत चिकित्सकों के लिए पीजी पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम हेतु अध्ययन अवकाश की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष किए जाने का निर्णय राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है। यह फैसला न केवल चिकित्सकों के शैक्षणिक विकास को मजबूती देगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

यह निर्णय लंबे समय से उठ रही मांगों और निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिसमें छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने लगातार शासन से संवाद कर इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया और अंततः सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

चिकित्सकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय

राज्य में कार्यरत चिकित्सकों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना हमेशा एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया रही है। सीमित अध्ययन अवकाश के कारण कई चिकित्सक अपने पीजी कोर्स को पूरी तरह से समर्पित समय नहीं दे पाते थे, जिससे उनके प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती थी।अब अध्ययन अवकाश को 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष किए जाने से चिकित्सकों को अपने पाठ्यक्रम को बेहतर तरीके से पूरा करने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में सहायक साबित होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में होगा सुधार

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षित चिकित्सक ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। जब चिकित्सकों को उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, तो वे नवीनतम तकनीकों और उपचार पद्धतियों में दक्ष बनेंगे। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा, क्योंकि प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर जटिल बीमारियों का अधिक प्रभावी उपचार कर सकेंगे। यह कदम राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

फेडरेशन के प्रयासों की सफलता- डॉ. हीरा सिंह लोधी,अध्यक्ष छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन 

छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह संगठन के निरंतर प्रयासों, संवाद और संघर्ष का परिणाम है। डॉ. हीरा सिंह ने बताया कि लंबे समय से इस मुद्दे को शासन के समक्ष रख रहे थे। यह निर्णय हमारे सामूहिक प्रयासों की सफलता को दर्शाता है और इससे सैकड़ों चिकित्सकों को लाभ मिलेगा।

पुराने बैच के चिकित्सकों की चिंता बरकरार

हालांकि इस निर्णय के बावजूद एक महत्वपूर्ण वर्ग अभी भी इससे वंचित है। वर्ष 2025 से पहले पीजी अध्ययन अवकाश पर गए चिकित्सकों को इस नई नीति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण 2021, 2022 और 2023 बैच के कई चिकित्सक प्रशासनिक समस्याओं और असमानताओं का सामना कर रहे हैं। इन चिकित्सकों को पहले आश्वासन दिया गया था कि उन्हें भी इस नीति का लाभ मिलेगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है।

समानता की मांग तेज- डॉ. रेशम सिंह ,अध्यक्ष जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने स्पष्ट कहा कि पुराने बैच के चिकित्सकों के साथ न्याय किया जाना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि उन्हें भी बढ़े हुए अध्ययन अवकाश के अनुरूप क्षतिपूर्ति और लाभ प्रदान किया जाना चाहिए। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने राज्य शासन से आग्रह किया कि इस विषय में शीघ्र निर्णय लेकर पूर्व में अध्ययन अवकाश पर गए चिकित्सकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

नीतिगत सुधार की दिशा में अहम कदम

यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य नीति में सुधार का संकेत भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए गंभीर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस नीति को सभी बैच के चिकित्सकों पर समान रूप से लागू किया जाता है, तो यह और अधिक प्रभावी साबित होगी।

भविष्य की रणनीति और अपेक्षाएं

छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी चिकित्सकों के अधिकारों की रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा। यह उम्मीद की जा रही है कि शासन जल्द ही पुराने बैच के चिकित्सकों के लिए भी सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे किसी प्रकार की असमानता समाप्त हो सके।

 


 

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page