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स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चुनौती: हजारों पद रिक्त -नए अस्पतालों पर संकट

Healthbhaskar.com: रायपुर, 23 मार्च 2026। रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बीच एक गंभीर चुनौती सामने आयी है। राज्य में स्वास्थ्य विभाग के लगभग 40 हजार स्वीकृत पदों में से 16 हजार से अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पहले से ही अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है, तो नए अस्पतालों का संचालन कैसे संभव होगा।

स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार बनाम मानव संसाधन की कमी

राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए लगातार नए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों की घोषणा की जा रही है। लेकिन दूसरी ओर, इन संस्थानों को संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन की भारी कमी चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भवन और उपकरणों के साथ-साथ प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। यदि यह संतुलन नहीं बना, तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

किन पदों पर सबसे ज्यादा कमी

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल कर्मचारियों के पदों पर सबसे ज्यादा रिक्तियां हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उन्हें बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।

मेडिकल कॉलेजों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण

पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय सहित राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की कमी देखी जा रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक होती है, लेकिन वहां पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज में देरी और दबाव की स्थिति बन जाती है। इससे न केवल मरीजों को परेशानी होती है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

नए अस्पतालों के संचालन पर सवाल

राज्य में कई नए अस्पतालों का निर्माण या घोषणा की गई है। लेकिन जब मौजूदा अस्पतालों में ही स्टाफ की कमी है, तो नए अस्पतालों को चालू करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते भर्ती प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो नए अस्पताल केवल भवन बनकर रह जाएंगे और अपेक्षित सेवाएं नहीं दे पाएंगे।

सरकार के प्रयास और चुनौतियां

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाती रही है, लेकिन विभिन्न कारणों से ये प्रक्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं। भर्ती में देरी, प्रशासनिक अड़चनें और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की पोस्टिंग और उनकी स्थायित्व भी एक बड़ी चुनौती है।

मरीजों पर सीधा असर

स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की कमी का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में लंबी कतारें देखने को मिल रही है जिसके कारण इलाज समय पर नहीं मिल पा रहा है। दूसरी तरफ विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के वजह से रेफरल मामलों में वृद्धि होती जा रही है। इन समस्याओं के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। राज्य में बढ़ती जनसंख्या और बीमारियों के मामलों को देखते हुए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ मानव संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन स्टाफ की भारी कमी इस दिशा में एक बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। नए अस्पतालों के संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी है कि रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

 


 

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