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कुपोषण मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक पहल, महिला समूहों को मिला स्व-रोजगार

Healthbhaskar.com: रायपुर, 17 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण और कुपोषण उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य के छह जिलों में रेडी-टू-ईट फूड निर्माण एवं वितरण का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 6 जिलों के कुल 42 महिला स्व-सहायता समूहों को आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार तैयार करने और उसका वितरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह योजना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस प्रयास के रूप में सामने आई है। इस पहल से न केवल बच्चों और माताओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण मिलेगा, बल्कि हजारों महिलाओं को स्थायी रोजगार भी प्राप्त होगा।

6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू हुई योजना

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रारंभ की गई यह योजना प्रथम चरण में प्रदेश के छह जिलों ,रायगढ़, बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार-भाठापारा, कोरबा एवं सूरजपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है। इन जिलों में चयनित महिला स्व-सहायता समूह आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषण युक्त रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री तैयार कर उसका वितरण करेंगे।

रायगढ़ बना प्रदेश का पहला जिला जहां शुरू हुआ उत्पादन

इस योजना के तहत रायगढ़ प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां महिला स्व-सहायता समूहों ने रेडी-टू-ईट फूड का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। यहां के 10 महिला समूहों को यह कार्य सौंपा गया है, जिससे स्थानीय महिलाओं को नियमित आय का सशक्त माध्यम प्राप्त हुआ है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी उल्लेखनीय सफलता मिलने की उम्मीद है।

जिलावार स्व-सहायता समूहों का वितरण

महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न जिलों में समूहों का वितरण इस प्रकार किया गया है जिसमे कोरबा ज़िले में 10 स्व-सहायता समूह ,रायगढ़ ज़िले में 10 स्व-सहायता समूह, सूरजपुर ज़िले में 7 स्व-सहायता समूह ,बलौदाबाजार-भाठापारा ज़िले में 7 स्व-सहायता समूह, बस्तर ज़िले में 6 स्व-सहायता समूह, दंतेवाड़ा ज़िले में 2 स्व-सहायता समूह, इन सभी समूहों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार का निर्माण और समयबद्ध वितरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री का बयान: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सहभागी बनाना है। रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य महिला समूहों को सौंपकर सरकार ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता, स्व-रोजगार और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत आधारशिला साबित होगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री का वक्तव्य

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह योजना महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी तथा महिला समूहों की बहनें अब स्वयं रेडी-टू-ईट निर्माण कर बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएंगी, जिससे उनकी आमदनी में भी निरंतर वृद्धि होगी।

कुपोषण मुक्ति अभियान को मिलेगी नई मजबूती

रेडी-टू-ईट योजना से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य में कुपोषण की समस्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। रेडी-टू-ईट योजना से स्थानीय स्तर पर निर्मित पोषण आहार गुणवत्ता, ताजगी और उपलब्धता तीनों दृष्टि से बेहतर साबित होगा।

 


 

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