नीट-पीजी में -40 कटऑफ करना प्रवेश परीक्षा नहीं, यह सीट सेल मॉडल है: डॉ. अमित व्यास
Healthbhaskar.com: नई दिल्ली 15 जनवरी, 2026। नीट-पीजी 2025 की क्वालिफाइंग कटऑफ को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन NBE द्वारा अभूतपूर्व रूप से माइनस (-40) तक घटाए जाने पर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन DMA INDIA ने कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन ने इसे मेरिट आधारित परीक्षा व्यवस्था का खुला पतन करार देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
डीएमए इंडिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र
डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार एवं राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियांशु शर्मा ने संयुक्त रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि नीट-पीजी अब ज्ञान, मेहनत और रैंक का प्रतीक नहीं रह गया है। पत्र में कहा गया है कि कटऑफ को माइनस (-40) तक लाना यह संकेत देता है कि अब प्रतियोगिता नहीं, बल्कि केवल उपस्थिति ही पर्याप्त मानी जा रही है।
यह मेरिट नहीं, मैनेजमेंट की परीक्षा बन गई
डीएमए इंडिया ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नई व्यवस्था में प्रश्न हल करना अनिवार्य नहीं रह गया है। रैंक केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, ज्ञान को “रेज़िडेंसी में एडजस्ट” करने की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि ₹2–3 करोड़ की आर्थिक क्षमता रखने वाला अभ्यर्थी शून्य या माइनस अंकों पर भी पीजी सीट प्राप्त कर सकता है, तो मेरिट आधारित राष्ट्रीय परीक्षा की आवश्यकता ही क्या रह जाती है ?
निजी मेडिकल कॉलेजों को सीधा लाभ
डॉ. अमित व्यास ने कड़े शब्दों में विरोध करते हुए बताया की इस निर्णय से निजी मेडिकल संस्थानों को अनुचित आर्थिक लाभ मिलेगा तथा मेहनती और योग्य छात्रों का मनोबल टूटेगा। भविष्य में रोगी सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। चिकित्सा शिक्षा कोई सामान्य अकादमिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन और सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
डीएमए इंडिया की प्रमुख मांगें
डीएमए इंडिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से तीन अहम मांगें रखी हैं जिसमे नीट-पीजी 2025 की संशोधित माइनस 40 कटऑफ तुरंत वापस ली जाए। स्वास्थ्य मंत्रालय, NMC, NBE एवं मेडिकल संगठनों को शामिल कर एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए। किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले पारदर्शी और व्यापक हितधारक परामर्श अनिवार्य किया जाए।
डीएमए इंडिया ने स्पष्ट किया कि संगठन मेरिट, नैतिकता और जनहित आधारित चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की पुनर्बहाली के लिए प्रतिबद्ध है।संगठन ने कहा की यदि सिस्टम को बदल नहीं सकते, तो उसे स्वीकार करने की ईमानदारी तो दिखाइए क्योंकि यह लड़ाई मेरिट और जनहित की है।
