PG सीटों में छत्तीसगढ़ के छात्रों की हिस्सेदारी आधी, JDA ने बताया ऐतिहासिक अन्याय
Healthbhaskar.com: रायपुर 8 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा तंत्र में एक बड़े नीति-स्तरीय बदलाव ने प्रदेश के MBBS छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा इंस्टीट्यूशनल प्रेफ़रेंस (IP) कोटा को 50% से घटाकर 25% करने के हालिया निर्णय को छात्र विरोधी, असंगत और राज्य की मेडिकल प्रणाली के लिए हानिकारक बताया है।
डॉ. रेशम सिंह,अध्यक्ष JDA ने बताया की यह निर्णय न केवल स्थानीय मेडिकल छात्रों के अधिकारों का हनन है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में वर्षों से स्थापित PG प्रवेश नीति को अस्थिर कर मेडिकल शिक्षा की संरचना प्रणाली को तहस-नहस कर सकता है।
अनिवार्य ग्रामीण सेवा और प्रशिक्षण का मूल्य घटा — ‘युवा डॉक्टरों के साथ विश्वासघात’
छत्तीसगढ़ में MBBS छात्र अनिवार्य ग्रामीण सेवा, बॉन्ड दायित्व, और कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया का पालन इस भरोसे पर करते हैं कि राज्य उन्हें पोस्टग्रेजुएट प्रवेश में उचित प्राथमिकता देगा। लेकिन IP कोटा को 50% से घटाकर 25% करने से उनका अधिकार सीधे आधा कर दिया गया है। JDA संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह कदम सेवा के बदले अधिकारों की कटौती है, जो किसी भी राज्य की मेडिकल शिक्षा नीति की मूल भावना के खिलाफ है।
75% PG सीटें बाहरी छात्रों के लिए खुली — स्थानीय छात्रों का भविष्य सीमित
नई व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव अत्यंत गंभीर है। जिसमे 50% सीटें पहले ही All India Quota (AIQ) में जाती हैं एवं शेष में से 25% State Open Category में आती है। और केवल 25% छत्तीसगढ़ के MBBS छात्रों के लिए सीटें बचती हैं। इस प्रकार कुल 75% सीटें बाहरी अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध हो गई हैं। JDA ने इसे राज्य के मेडिकल संसाधनों का बाहरीकरण बताया है, जो छत्तीसगढ़ प्रदेश के मेडिकल छात्रों के हितों के विपरीत है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस निर्णय को WPC No. 5937/2025 के आदेश पर आधारित बताया है। लेकिन JDA का कहना है कि न्यायालय ने डबल फ्रैग्मेंटेशन लागू करने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया था। तुलनात्मक उदाहरण में, मध्य प्रदेश समान परिस्थितियों के बावजूद अपना 50% IP मॉडल बनाए हुए है। इससे साफ है कि छत्तीसगढ़ का निर्णय न तो मजबूरी था और न ही कानूनी रूप से अनिवार्य बल्कि यह एक गलत व्याख्या पर आधारित मनमाना कदम है।
गंभीर और दीर्घकालिक खतरे — स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रभाव
JDA ने चेताया कि यदि यह नीति जारी रही तो भविष्य में दुष्परिणाम सामने आएंगे जैसे की स्थानीय डॉक्टरों का बड़े पैमाने पर राज्य से पलायन हो सकता है। PG न मिलने पर छात्रों पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का आर्थिक बोझ वहन करना पड़ सकता है। मेधावी स्थानीय युवाओं के अवसरों की निरंतर कमी आने के कारण ग्रामीण व जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी आज भी देखने को मिलती है। JDA का कहना है कि यह केवल छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य की हेल्थकेयर क्वालिटी से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
JDA का स्पष्ट संदेश और मांगें
डॉ. रेशम सिंह,अध्यक्ष JDA ने बताया की यदि हम आज चुप रहे, तो कल हमारा पूरा अधिकार समाप्त कर दिया जाएगा। IP कोटा की 50% बहाली केवल मांग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों का वैधानिक हक़ है। JDA ने स्वास्थ्य विभाग से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं जिसमें IP कोटा को फिर से 50% पर बहाल किया जाए। न्यायालय के आदेश की सही और तथ्य आधारित व्याख्या की जाए। एवं स्थानीय MBBS छात्रों के हितों को संरक्षित करने के लिए स्थायी नीति ढाँचा बनाया जाए।
