एम्स रायपुर में वायरल रोग जांच पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
Healthbhaskar.com:रायपुर, 13 मार्च 2026। एम्स रायपुर में वायरल संक्रामक रोगों की आधुनिक जांच तकनीकों को लेकर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। “रियल टाइम पीसीआर एवं डिजिटल पीसीआर फॉर डायग्नोसीस ऑफ वायरल इन्फेक्शन डिसीसेस विषय पर आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 और 13 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन संस्थान के स्टेट वायरल रीसर्च एन्ड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उन्नत मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीकों की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल, अशोक जिंदल सेवानिवृत्त और डीन अकादमिक एली महापात्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष उज्ज्वला गायकवाड़,आयोजन सचिव तथा संजय नेगी सह-आयोजन सचिव,एवं माधवी मडके सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और चिकित्सक उपस्थित थे।
उन्नत मॉलिक्यूलर तकनीकों पर दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वायरल रोगों की सटीक और त्वरित पहचान के लिए उपयोग की जाने वाली अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विशेष रूप से रियल टाइम पीसीआर एवं डिजिटल पीसीआर तकनीक के सिद्धांत, उपयोगिता और प्रयोगात्मक प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रतिभागियों को डीएनए एक्सट्रेक्शन की मैनुअल और ऑटोमेटेड विधियों,नैनोड्रॉप स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री यह एक उन्नत प्रयोगशाला तकनीक है, जो केवल 1-2
माइक्रोलीटर नमूने का उपयोग करके डीएनए (DNA), आरएनए (RNA) और प्रोटीन की सघनता और शुद्धता को बहुत तेजी से मापती है, इस तकनीक के माध्यम से डीएनए क्वान्टीफिकेशन और रियल टाइम पीसीआर रिएक्शन सेटअप की प्रक्रिया का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने डिजिटल पीसीआर तकनीक के माध्यम से क्लिनिकल सैंपल में वायरल लोड की सटीक माप की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
वायरल रोगों की त्वरित पहचान में नई तकनीकों का महत्व
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. अशोक जिंदल ने कहा कि आधुनिक समय में मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीकें वायरल संक्रामक रोगों की त्वरित और सटीक पहचान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही वायरस का पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार और रोकथाम की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।
एम्स रायपुर VRDL नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज NABL से मान्यता प्राप्त है। साथ ही यहां मध्य भारत की पहली बायो सेफ्टी लेवल -3 प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जो वायरल रोगों की उन्नत जांच और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।
विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने साझा किया अनुभव
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह और डॉ. वैभव ताम्रकार सहित VRDL की तकनीकी टीम द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त बायो रेड लैबोरेट्रीज इंडिया के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी डिजिटल पीसीआर तकनीक पर व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को नवीनतम उपकरणों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
प्रदेशभर से विशेषज्ञों की भागीदारी
इस दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों से आए फैकल्टी सदस्य, वैज्ञानिक, पीएचडी शोधार्थी, स्नातकोत्तर छात्र और लैब तकनीशियन बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों को समझने और प्रयोग में लाने का अवसर मिला। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा अनुसंधान और रोग निदान प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
