एनएमसी व डीआरपी नियमों के उल्लंघन पर डॉक्टर संगठनों का तीखा विरोध, डीएमए इंडिया व आरडीए अग्रोहा ने निदेशक को सौंपा ज्ञापन
Healthbhaskar.com: हिसार,11 दिसंबर। हरियाणा में HCMSA की हड़ताल के बीच पीजी डॉक्टरों को बिना वरिष्ठ सुपरविजन के सिविल अस्पतालों में तैनात किए जाने के आदेश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। डीएमए इंडिया और आरडीए अग्रोहा ने इस निर्णय को एनएमसी तथा डीआरपी दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन बताया है। बुधवार को दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी), अग्रोहा की निदेशक डॉ. अलका छाबड़ा को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम ज्ञापन सौंप कर तत्काल आदेश वापस लेने की मांग रखी है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आरडीए अग्रोहा के महासचिव डॉ. अमित व्यास, आरडीए अग्रोहा के संस्थापक डॉ. सन्नी, तथा अध्यक्ष डॉ. अविनाश शामिल थे। सभी पदाधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि पीजी डॉक्टरों को बिना किसी वरिष्ठ विशेषज्ञ की निगरानी के सिविल अस्पतालों में भेजना न केवल मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम भी है।
सुपरविजन के बिना तैनाती: नियमों का स्पष्ट उल्लंघन
डॉक्टर संगठनों ने बताया कि एनएमसी (NMC) द्वारा निर्धारित विभागीय रोटेशन और प्रशिक्षण संरचना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें पीजी छात्रों को अकेले, बिना सीनियर सुपरविजन, स्वतंत्र कार्य हेतु भेजा जा सकता है। डीआरपी (Duty Roster Protocol) स्पष्ट करता है कि पीजी डॉक्टर्स को केवल सीनियर डॉक्टरों की उपस्थिति में ही ड्यूटी करने की अनुमति है। ऐसे आदेश न केवल अकादमिक लॉस, बल्कि पेशेंट सेफ्टी रिस्क, और मेडिकल एथिक्स के विरुद्ध हैं।
डीएमए इंडिया व आरडीए अग्रोहा ने ज्ञापन में अपनी स्पष्ट माँगे उल्लेख की है, जिसमे पीजी डॉक्टरों की सिविल अस्पतालों में तैनाती से संबंधित सभी आदेश तत्काल निरस्त किए जाएँ। पीजी डॉक्टरों को उनके मूल मेडिकल संस्थानों में ही एनएमसी-अनुरूप अकादमिक प्रशिक्षण जारी रखने दिया जाए। डीआरपी दिशा-निर्देशों के अनुसार सीनियर सुपरविजन के बिना किसी भी पीजी डॉक्टर से कार्य न कराया जाए।
डीएमए इंडिया और आरडीए अग्रोहा ने कहा कि यह मामला केवल डॉक्टरों का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों के अधिकारों, इलाज की गुणवत्ता, और भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डॉक्टरों की व्यापक उपस्थिति
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधिमंडल में डॉ. राहुल राव, डॉ. संदीप, डॉ. गजेन्द्र, डॉ. निवेदिता, डॉ. चाँद, डॉ. सौरभ, डॉ. सचिन, डॉ. निशांत, डॉ. अमित ग्रेवाल, डॉ. दीक्षा शर्मा सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर मौजूद रहे। सभी ने सरकार के इस निर्णय को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए आदेश को तुरंत वापस लेने हेतु आग्रह किया है।
