छत्तीसगढ़ में हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरुआत की तैयारी – सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी दिशा, मरीजों को नई उम्मीद
Healthbhaskar.com: रायपुर, 22 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplant) को शुरू करने की दिशा में ठोस पहल हुई है। इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ कार्डियक सर्जन और कार्डियक एनीस्थिटिस्ट एसोसिएशन ने 20 सितंबर को होटल सयाजी में एक विशेष सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में गुजरात के अहमदाबाद स्थित सिम्स हॉस्पिटल के ख्यातिप्राप्त हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. धीरेन शाह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
डॉ. शाह देश में हार्ट और हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के अग्रदूत माने जाते हैं और अब तक 60 से अधिक प्रत्यारोपण शल्यक्रियाएं कर चुके हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरुआत बेहद आवश्यक है, क्योंकि यहां हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई मरीजों का जीवन केवल प्रत्यारोपण के सहारे ही बच सकता है।
हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता क्यों?
कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू और सचिव डॉ. अरुण अंडप्पन ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ऐसे मरीज बड़ी संख्या में आते हैं जिनके दिल की पंपिंग क्षमता मात्र 15-20% रह जाती है। इसे आम भाषा में हार्ट फेल्योर कहा जाता है। उन्होंने एक उदाहरण साझा किया – 16 वर्षीय एक लड़की, जिसे कोरोना संक्रमण के बाद वायरल मायोकार्डाइटिस हुआ। उसका दिल सिर्फ 10-15% ही काम कर रहा था। ऐसे में एक 49 वर्षीय ब्रेन डेड मरीज का हृदय उसे प्रत्यारोपित किया गया और आज वह लड़की पूरी तरह सामान्य जीवन जी रही है। इस तरह के उदाहरण यह साबित करते हैं कि समय पर हृदय प्रत्यारोपण मरीजों को नया जीवन देने में सक्षम है।
हृदय रोग के प्रमुख कारण में हार्ट फेल्योर के मुख्य कारण हैं जिसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज,जन्मजात हृदय रोग ,वॉल्व डिजीज ,डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी इन सभी कारणों से हजारों मरीजों को गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है और समय पर इलाज न मिलने पर उनकी जान पर बन आती है।
अंगदान और जागरूकता की कमी
सेमिनार में इस बात पर जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ में डोनर हार्ट (Donor Heart) की भारी कमी है। जिसका मुख्य कारण है अंगदान के प्रति जागरूकता का अभाव होना पाया गया है। सरकार और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में समझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। धीरे-धीरे लोग इस विषय में जागरूक हो भी रहे हैं, लेकिन अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।
हार्ट ट्रांसप्लांट की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
डॉ. धीरेन शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई ऐसे अस्पताल हैं जहां हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इसके लिए संस्थानों को लाइसेंस प्राप्त करना होगा और डॉक्टरों व एनस्थेटिस्ट्स को विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। उन्होंने यहां के डॉक्टरों को ट्रेनिंग के लिए आमंत्रित भी किया। उन्होंने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं है बल्कि पूरी टीमवर्क का नतीजा है। हार्ट सर्जन ,कार्डियक एनीस्थिटिस्ट ,काउंसलर ,ऑर्गन ट्रांसपोर्ट सिस्टम ,पोस्ट-ऑपरेटिव मैनेजमेंट ,इम्यूनोथेरेपी विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों को पहले ही हार्ट ट्रांसप्लांट की अनुमति मिल चुकी है, जिनमें एम्स रायपुर, सत्य साईं इंस्टिट्यूट (नया रायपुर) और कुछ निजी अस्पताल शामिल हैं। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए विशेष पैकेज भी उपलब्ध है।
नई तकनीक पर चर्चा
इस सेमिनार में केवल हार्ट ट्रांसप्लांट ही नहीं बल्कि हृदय वाल्व संबंधी नई तकनीकों पर भी चर्चा हुई। विशेषकर माइट्रल वाल्व और ट्राइकस्पिड वाल्व सर्जरी से जुड़ी नई विधियों को साझा किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि माइट्रल वाल्व लीकेज वाले हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती, कुछ मरीज दवाओं से भी ठीक हो सकते हैं।
व्यापक सहभागिता
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 35 से अधिक कार्डियक सर्जन, कार्डियक एनीस्थेटिस्ट और MCh के छात्र शामिल हुए। सभी ने इसे राज्य की चिकित्सा सेवाओं के विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। यह सेमिनार छत्तीसगढ़ में हार्ट ट्रांसप्लांट की दिशा में एक नई शुरुआत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए और चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर विशेष केंद्र विकसित किए जाएँ तो निकट भविष्य में राज्य में भी मरीजों को विश्वस्तरीय हृदय प्रत्यारोपण सुविधाएँ मिल सकेंगी। इस पहल से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के मरीजों को नई उम्मीद और जीवन का नया अवसर मिलेगा।
