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नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ का चरणबद्ध आंदोलन जारी, तीसरे चरण के दूसरे दिन काली पट्टी लगाकर जताया विरोध

Healthbhaskar.com: रायपुर | 16 दिसंबर 2025 नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ द्वारा लंबित मांगों को लेकर चलाया जा रहा चरणबद्ध आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन के तीसरे चरण के द्वितीय दिवस पर आज डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के परिसर में नर्सिंग संवर्ग ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नर्सिंग कर्मियों ने सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक नारेबाजी कर शासन–प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकृष्ट किया है।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मई 2018 में नर्सिंग संवर्ग द्वारा किए गए प्रदेश स्तरीय आंदोलन के दौरान कई कर्मचारियों को दो दिनों तक जेल में रखा गया था। उस समय शासन द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर मांगें पूर्ण करने का आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराया गया था। समिति ने तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी, किंतु 30 जून 2021 को बिना किसी ठोस कारण के उस रिपोर्ट को अमान्य कर दिया गया, जिससे नर्सिंग कर्मियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

संघ ने यह भी स्मरण कराया कि 4 जुलाई 2024 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया था कि दो माह के भीतर होने वाली कैबिनेट बैठक में संबंधित फाइल प्रस्तुत की जाएगी। बावजूद इसके, लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी समिति की अनुशंसाओं को लागू नहीं किया गया है। नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि इस देरी का सीधा असर अस्पतालों की कार्यप्रणाली, नर्सिंग स्टाफ के मनोबल और रोगी देखभाल की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

स्टाफ की कमी और नीतिगत देरी पर नर्सिंग कर्मियों का विरोध

नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि राज्य के सबसे बड़े 1310 बिस्तरों वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में वर्ष 2016 के बाद से स्टाफ नर्सों की नियमित भर्ती नहीं हुई है। स्वीकृत 526 पदों में से लगभग 400 पद रिक्त हैं, जिससे कार्यरत नर्सिंग कर्मियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की कमी सीधे तौर पर रोगी सुरक्षा और उपचार परिणामों को प्रभावित करती है।

मांगें नहीं मानी तो उग्र होगा आंदोलन, नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन का ऐलान

संघ की प्रमुख मांगों में वर्ष 2018 की समिति की अनुशंसाओं को लागू करना, स्टाफ नर्सों की नियमित भर्ती, संविदा एवं डेली वेजेस कर्मचारियों का नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, पदनाम संशोधन, केंद्र सरकार के अनुरूप नर्सिंग एवं वाशिंग अलाउंस, अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन भुगतान, अस्पतालों में झूला घर की व्यवस्था, समयमान वेतनमान की बकाया राशि का भुगतान, कैशलेस उपचार सुविधा तथा पदोन्नति शामिल हैं। इसके अतिरिक्त गंभीर मरीजों के परिजनों के ठहरने, भोजन और शौचालय की समुचित व्यवस्था की भी मांग की गई है।

लंबित मांगों पर नर्सिंग संवर्ग का आक्रोश, तीसरे चरण के दूसरे दिन प्रदर्शन

राजधानी रायपुर के साथ-साथ अंबिकापुर, महासमुंद और जगदलपुर चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग ने भी आज के आंदोलन में सहभागिता की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। चतुर्थ चरण के अंतर्गत 29, 30 एवं 31 दिसंबर को निश्चितकालीन आंदोलन प्रस्तावित है।


 

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