बिना शर्तें बताए बॉन्ड पर सहमति नहीं: MBBS इंटर्न्स के समर्थन में डीएमए का हरियाणा के मुख्यमंत्री को ज्ञापन
Healthbhaskar.com: चंडीगढ़ 27 जनवरी , 2026। पं. बी.डी. शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक (UHSR) से संबद्ध सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों के MBBS 2020 बैच के इंटर्न्स की बॉन्ड नीति को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA इंडिया) ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी एवं चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक (DMER), हरियाणा को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
डीएमए इंडिया ने उठाए नीति की पारदर्शिता पर सवाल
डीएमए इंडिया द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि DMER की अधिसूचना दिनांक 01.01.2026 के माध्यम से MBBS इंटर्न्स से बॉन्ड नीति पर सहमति अपेक्षित की जा रही है, जबकि नीति से जुड़े मूलभूत बिंदु अब भी अस्पष्ट हैं।
किन बिंदुओं पर है सबसे अधिक आपत्ति
डीएमए ने स्पष्ट किया कि बॉन्ड नीति से संबंधित बिंदुओं में सेवा दायित्व ,कार्य अवधि ,वेतन या मानदेय ,पदस्थापन की प्रकृति ,स्नातकोत्तर (PG) प्रवेश पर प्रभाव ,कानूनी एवं प्रशासनिक ढांचा जैसी आवश्यक जानकारियाँ साझा किए बिना सहमति लेना अनुचित और असंवैधानिक है।
संयुक्त रूप से जारी हुआ ज्ञापन
यह पत्र डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार एवं राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियंशु शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया है।
डीएमए इंडिया ने मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें
- विस्तृत एवं स्पष्ट अधिसूचना जारी की जाए :- जिसमें बॉन्ड नीति की सीमा, सेवा शर्तें, पदस्थापन, वेतन/मानदेय, सेवा अवधि, PG प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं पर प्रभाव तथा विधिक क्रियान्वयन तंत्र का स्पष्ट उल्लेख हो।
- उच्चस्तरीय औपचारिक बैठक बुलाई जाए :- DMER स्तर पर शीघ्र एक बैठक आयोजित की जाए, जिसमें सक्षम अधिकारी एवं संबंधित मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल हों, ताकि संरचित, पारदर्शी और निर्णायक चर्चा संभव हो सके।
डीएमए अध्यक्ष का स्पष्ट संदेश
डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि बिना नियम बताए सहमति माँगना प्रशासनिक रूप से आसान हो सकता है, लेकिन यह संस्थागत और नैतिक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटर्न्स सेवा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले यह बताया जाना चाहिए कि सेवा किस शर्त पर, कितने समय के लिए और किस भविष्य के साथ अपेक्षित है। डीएमए इंडिया संगठन के सदस्यों ने कहा है कि जिम्मेदार और समयबद्ध संवाद ही इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान है। अस्पष्ट नीतियाँ न केवल छात्रों के करियर को प्रभावित करती हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में अविश्वास भी पैदा करती हैं।

