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पं. जेएनएमएमसी रायपुर में एमबीबीएस छात्रों ने मनाया वसंत पंचमी, संस्कृति से संस्कार तक: मेडिकल शिक्षा में भारतीय परंपरा का सशक्त संदेश

Healthbhaskar.comरायपुर 27  जनवरी , 2026। भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक चेतना और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध का प्रतीक वसंत पंचमी इस वर्ष पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज (जेएनएमएमसी), रायपुर में विशेष उत्साह और वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। जहाँ एमबीबीएस छात्रों द्वारा 23 फरवरी 2025 को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ इंडिक सभ्यता की सांस्कृतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक विरासत को समझना और सहेजना था।

ईशावास्य उपनिषद के श्लोक से आरंभ

कार्यक्रम की वैचारिक पृष्ठभूमि ईशावास्य उपनिषद के श्लोक 11 से स्थापित की गई ,“विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभ्य सह।अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते॥” इस श्लोक के माध्यम से छात्रों को यह संदेश दिया गया कि ज्ञान और व्यवहारिक अनुभव दोनों का संतुलन ही जीवन और चिकित्सा पेशे को सार्थक बनाता है।

वसंत: प्रकृति, चेतना और नवचेतना का प्रतीक

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, सर्दियों की निष्क्रियता से वसंत की सक्रियता में संक्रमण का संकेत देती है। यह परिवर्तन केवल ऋतु का नहीं, बल्कि मानवीय चेतना, रचनात्मकता और आत्मिक विकास का भी प्रतीक है। कार्यक्रम में इसी भाव को केंद्र में रखते हुए वसंत पंचमी को आंतरिक जागृति और बौद्धिक विकास के पर्व के रूप में प्रस्तुत किया गया।

लोक नृत्य, संगीत और पीली वेशभूषा से सजा परिसर

कार्यक्रम में लोक नृत्य, शास्त्रीय एवं लोक संगीत तथा बांसुरी वादन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पीले रंग की पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्रों और छात्राओं ने सकारात्मक ऊर्जा, सौहार्द और उल्लास का वातावरण निर्मित किया, जो वसंत पंचमी के मूल भाव को जीवंत करता दिखाई दिया।

वसंत पंचमी का ऐतिहासिक और अंतर-धार्मिक दृष्टिकोण

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के सचिव डॉ. अमित बंजारा ने अपने संबोधन में वसंत पंचमी के ऐतिहासिक, सामाजिक और धार्मिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि आधारित अनुष्ठान समय के साथ बौद्ध, जैन, सूफी, सिख और हिंदू परंपराओं में समाहित होकर भारतीय उपमहाद्वीप की अर्थव्यवस्था, समाज और आध्यात्मिक चेतना को नयी दिशा देता रहा है।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ डीन डॉ. विवेक चौधरी, अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, संकाय सदस्यों और छात्रों द्वारा देवी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने चिकित्सा छात्रों से संस्कृति, करुणा और नैतिक मूल्यों को अपने पेशे का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

मेडिकल शिक्षा में सांस्कृतिक चेतना का संदेश

यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित न रहकर, भारतीय ज्ञान परंपरा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़कर ही पूर्ण हो सकती है।


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