अल्ट्राथिन तकनीक से जटिल TAVI प्रक्रिया में ऐतिहासिक सफलता, अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक केयर पर बढ़ा भरोसा
Healthbhaskar.com: रायपुर, 8 जनवरी 2026। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर स्थित एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट (ACI) ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक असाधारण चिकित्सकीय उपलब्धि के साथ की है। अत्यंत जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) प्रक्रिया के दौरान बंद हो रही हृदय की प्रमुख नसों को स्टेंट के माध्यम से “चिमनी तकनीक” अपनाकर पुनः सक्रिय किया गया और एक बुजुर्ग महिला मरीज की जान बचाई गई। यह सफलता सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उन्नत कार्डियोलॉजी सेवाओं की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गईं। वर्ष 2009 में मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ यह विभाग आज प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक प्रक्रियाओं का केंद्र बन चुका है।
20 प्रतिशत पंपिंग क्षमता, ओपन हार्ट सर्जरी असंभव
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थीं। जांच में पाया गया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था और हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। ऐसे में कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी विभाग की संयुक्त हार्ट टीम ने बिना चीर-फाड़, पैर की नस के माध्यम से TAVI प्रक्रिया का निर्णय लिया।
प्रक्रिया के दौरान आई गंभीर जटिलताएँ
विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ कि मरीज की पैर की नसें अत्यंत पतली और कैल्शियमयुक्त थीं। साथ ही, जन्मजात संरचनात्मक कारणों से कोरोनरी धमनियाँ वाल्व के बेहद करीब थीं, जिससे वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान उनके बंद होने का गंभीर खतरा था। इस चुनौती से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने अल्ट्राथिन (अत्यंत पतले) डिलीवरी सिस्टम का उपयोग करते हुए दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर वाल्व और धमनियों के बीच “चिमनी” संरचना तैयार की।
चार घंटे की प्रक्रिया, टेबल पर ही दिखा चमत्कारी परिणाम
प्रक्रिया के अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में अचानक ब्लॉकेज हो गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर दूर किया गया।
करीब चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा और हृदय की धड़कन स्थिर बनी रही।
विशेषज्ञ टीम और अत्याधुनिक निगरानी
यह जटिल प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव और डॉ. प्रिंस द्वारा संपन्न की गई। कैथलैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ के साथ कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गयी । प्रक्रिया के बाद मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में रिमोट व्यूइंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से अति गहन निगरानी में रखा गया। वर्तमान में मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुकी हैं।अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शासकीय अस्पतालों में उन्नत हृदय उपचार की दिशा में मील का पत्थर है।
