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PG एडमिशन नियमों पर टकराव, राज्य शासन से तत्काल अधिसूचना की मांग

Healthbhaskar.comरायपुर 19 जनवरी , 2026। छत्तीसगढ़ में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की MD/MS पीजी सीटों को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक चरण में पहुंच गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में जारी स्पष्टीकरण आदेश में उस पूर्व निर्णय के संबंधित हिस्से को वापस ले लिया गया है, जिसके कारण राज्य शासन यह मान बैठा था कि अन्य राज्यों से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों को भी राज्य कोटे की शासकीय PG सीटों में शामिल करना अनिवार्य है।

संस्थागत वरीयता पर न्यायालय की स्पष्ट मुहर

न्यायालय के संशोधित आदेश से अब यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है कि राज्य सरकार को अपने ही शासकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले विद्यार्थियों को संस्थागत वरीयता देने का पूर्ण वैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि शासकीय PG सीटों को बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए खोलने का कोई बाध्यकारी न्यायिक निर्देश नहीं था।

शासकीय PG सीटों पर राज्य के छात्रों को प्राथमिकता मिले: डॉ. हीरा सिंह

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ हीरा सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब न्यायालय ने स्वयं अपने आदेश में संशोधन कर राज्य को यह अधिकार पुनः प्रदान कर दिया है, तब शासन का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व बनता है कि वह 01.12.2025 को लाए गए अन्यायपूर्ण नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस ले और शासकीय कॉलेजों की शेष राज्य कोटे की सीटों पर पुनः अपने राज्य के विद्यार्थियों के हित में नई अधिसूचना जारी करे।

JDA छत्तीसगढ़ का शासन से सीधा सवाल

Junior Doctors Association, Chhattisgarh ने कहा है कि जब न्यायालय स्वयं अपने आदेश में संशोधन कर राज्य को उसका अधिकार लौटा चुका है, तो शासन का यह संवैधानिक और नैतिक दायित्व बनता है कि वह 01.12.2025 को लागू किए गए नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करे।

राज्य कोटे की सीटों को “स्टेट ओपन” घोषित करें – डॉ. रेशम सिंह जेडीए अध्यक्ष

डॉ. रेशम सिंह जेडीए अध्यक्ष ने बताया कि शासकीय मेडिकल कॉलेज पहले ही अपनी 50% सीटें अखिल भारतीय कोटे को दे चुके हैं। इसके बावजूद शेष राज्य कोटे की सीटों को “स्टेट ओपन” घोषित कर बाहरी अभ्यर्थियों के लिए खोल दिया गया था।अब जबकि कोर्ट ने संस्थागत वरीयता को वैध ठहरा दिया है, शासन के पास छात्रों से सीट छीनने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता है।

नीति निर्धारण में असमान गति पर आपत्ति

डॉ. रेशम सिंह जेडीए अध्यक्ष एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि जब छात्रों के अहित में एक सप्ताह के भीतर नया नियम राजपत्र में प्रकाशित किया जा सकता है, तो छात्रों के हित में वही तत्परता क्यों नहीं दिखाई जा रही है ?

जेडीए संगठन की प्रमुख मांगें

01.12.2025 के PG Admission Rules तत्काल निरस्त किए जाना चाहिए। शासकीय कॉलेजों में संस्थागत वरीयता बहाल कर नई अधिसूचना जल्द जारी हो। आगामी काउंसलिंग संशोधित नियमों के तहत कराई जाएं तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

भविष्य पर मंडराता संकट

जेडीए संगठन ने कड़ा रुख अपनाते शासन को जल्द ही इस मामले कार्यवाही करने की मांग की है जिससे राज्य के मेधावी सरकारी डॉक्टरों के भविष्य के साथ स्थायी न्याय हो।

 

 


 

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