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छत्तीसगढ़ में पहली बार: दाएं वेंट्रिकल में फंसी गोली को सटीक एक्स-रे ने खोजा, सर्जरी से बची जान

Healthbhaskar.com: रायपुर, 26 नवंबर 2025 डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ने आपातकालीन चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसे लंबे समय तक उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध इस अस्पताल की हार्ट सर्जरी टीम ने एक 40 वर्षीय मरीज के हृदय में फंसी गोली को ओपन हार्ट सर्जरी कर सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचाई। इस जटिल और जोखिमपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू द्वारा किया गया है।

मरीज को महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र से गंभीर गोली लगने की स्थिति में अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में लाया गया था। छाती में लगी गोली फेफड़ों को चीरती हुई सीधे हार्ट के दाएं वेंट्रिकल (Right Ventricle) में जा धँसी थी। यह स्थिति तत्काल जीवन-रक्षक हस्तक्षेप की मांग कर रही थी।

मरीज की हालत: कार्डियक टैम्पोनेड का जीवन-घातक खतरा

जब मरीज इस हालत में आंबेडकर अस्पताल पहुँचा तब मरीज़ का ब्लड प्रेशर मात्र 70/40 mmHg था। अत्यधिक रक्तस्राव और हृदय के चारों ओर जमते रक्त ने हार्ट की पम्पिंग क्षमता को लगभग रोक दिया था। चिकित्सा विज्ञान में इसे कार्डियक टैम्पोनेड (Cardiac Tamponade) कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कुछ ही मिनटों में मरीज की जान जा सकती है। आंबेडकर अस्पताल की ट्रॉमा टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार से बुनियादी से स्थिरता प्रदान करके इसके बाद कराया गया सीटी स्कैन रिपोर्ट में पाया की गोली पीठ से प्रवेश कर पसलियों को भेदते हुए फेफड़ों को चीरती हुई हृदय के दाएं हिस्से में गहराई तक धँसी हुई थी।

फौरन ओपन हार्ट सर्जरी का जीवनरक्षक निर्णय

मरीज़ की परिस्थिति अत्यंत ही गंभीर थी। मरीज़ की जीवन रक्षा के लिए एक मात्र विकल्प केवल तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी का था। मरीज के परिजनों को उच्च जोखिम और “Death on Table” जैसी संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए सहमति ली गई। उसे तुरंत कार्डियक सर्जरी OT में शिफ्ट किया गया। सर्जरी के दौरान हार्ट-लंग मशीन की मदद से मरीज के हृदय की पंपिंग को नियंत्रित रूप में रखा गया। इसके बाद राइट एट्रियम (Right Atrium) को काटकर ट्राइकस्पिड वाल्व पार करते हुए दाएँ वेंट्रिकल तक पहुँचा गया ,जहाँ गोली फसी हुयी थी। यहीं हार्ट की दीवार में धँसी हुई गोली को सुरक्षित तरीके से बहार निकाला गया। जो की इस ऑपरेशन की सबसे जटिल चुनौती थी। जिसे आंबेडकर अस्पताल की टीम ने बखूबी इस जटिल चुनौती को पार किया।

ऑपरेशन का सबसे कठिन हिस्सा: गोली कहाँ है ?

इस सर्जरी का वास्तविक कठिन चरण था, हृदय की मांसपेशी में गहराई तक धँसी गोली की सटीक लोकेशन का पता लगाना। प्रारंभिक प्रयास के रूप में Transesophageal Echocardiography (TEE) का उपयोग किया गया, परंतु गोली की सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने मूवेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन का सहारा लिया। यह टेक्नोलॉजी तस्वीरों को तुरंत स्क्रीन पर भेज देती है और इस ऑपरेशन में वह जीवनरक्षक साबित हुई। कई एंगल से एक्स-रे करने के बाद ही गोली की सही स्थिति का पता चल सका। यह तकनीक और टीम की सटीकता इस जटिल सर्जरी में प्रमुख कारक रही।

चार घंटे लंबा संघर्ष, टीम की एकजुट मेहनत

सर्जरी लगभग चार घंटे चली और इस दौरान लगभग 7 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। डॉक्टरों ने फेफड़े में हुए छेद और हृदय की क्षतिग्रस्त दीवारों की भी मरम्मत की। ऑपरेशन के पश्चात मरीज की स्थिति अब लगातार सुधार पर है,और कुछ दिनों में उसे डिस्चार्ज किए जाने की संभावना है।

डॉ. विवेक चौधरी, डीन पं. नेहरू मेडिकल कॉलेज ने की टीम की सराहना

पं. नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, ने बताया की यह ऑपरेशन टीम की रैपिड रिस्पांस और एक्यूरेसी का उत्कृष्ट उदाहरण है। इतने जोखिमपूर्ण केस में सफलता हासिल करना चिकित्सा महाविद्यालय की काबिलियत को दर्शाता है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल ने बताया की आंबेडकर अस्पताल की पहचान ही यही है की कठिन से कठिन परिस्थिति में भी मरीज की जान बचाने का पूर्ण प्रयास किया गया एवं हमारी टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया है।

इस जटिल और जोखिमपूर्ण सर्जरी का सफल ऑपरेशन में डॉ. कृष्णकांत साहू हार्टचेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन, डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप कार्डियक एनेस्थेटिस्ट ,अंकिता, डिगेश्वर परफ्यूजनिस्ट ,डॉ. रेशम सिंह सर्जरी PG , सर्जिकल/एनेस्थीसिया टेक्नीशियन एवं नर्सिंग टीम में भूपेंद्र, हरीश, राजेंद्र, चोवा, दुष्यंत, प्रियंका, मुनेश, तेजेंद्र, नरेंद्र, शिवाशामिल, फिज़िशियन असिस्टेंट नूतन ,जूनियर डॉक्टर डॉ. संजय त्रिपाठी, डॉ. ख्याति, डॉ. आयुषी खरे विशेषज्ञ की टीम में शामिल थे।

यह केस केवल एक सफल सर्जरी नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा, टीमवर्क, तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का एक अद्वितीय संगम है। छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी मरीज को दिल के अंदर फंसी गोली के साथ जीवित बचाया गया है। अम्बेडकर अस्पताल की यह उपलब्धि न केवल राज्य, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए गौरव का विषय है।

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