डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल बना निःशुल्क कैंसर उपचार का भरोसेमंद केंद्र
Healthbhaskar.com: रायपुर 04 फरवरी 2026। हर वर्ष 4 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व कैंसर दिवस न केवल एक जागरूकता दिवस है, बल्कि यह हमें कैंसर के प्रति हमारी सोच और उपचार के तरीकों पर पुनर्विचार करने का अवसर भी देता है। वर्ष 2025 की थीम “यूनाइटेड बाय यूनिक ” इस बात को रेखांकित करती है कि कैंसर का हर मरीज, हर अनुभव और हर संघर्ष अनोखा होता है। इसी सोच के साथ डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर स्थित क्षेत्रीय कैंसर संस्थान ने व्यक्ति-केंद्रित कैंसर देखभाल को अपनी कार्यशैली का मूल आधार बनाया है।
कैंसर: एक बीमारी नहीं, एक मानवीय अनुभव
कैंसर केवल एक मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है बल्कि इसमें दर्द,आशा, संघर्ष, धैर्य एवं परिवार का साथ जुड़ा होता है। हर मरीज की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक आवश्यकताएँ अलग होती हैं। इसी कारण आधुनिक कैंसर चिकित्सा में पीपल सेन्ट्रिक कैंसर केयर यानी व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण को सर्वोत्तम माना जा रहा है, जहाँ इलाज से पहले मरीज को एक इंसान के रूप में समझा जाता है।
छत्तीसगढ़ का एकमात्र शासकीय कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर
रायपुर स्थित क्षेत्रीय कैंसर संस्थान छत्तीसगढ़ का एकमात्र शासकीय कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर है, जहाँ राज्य के हर वर्ग के मरीजों को प्रारंभिक अवस्था से लेकर अंतिम अवस्था तक निःशुल्क एवं समग्र कैंसर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। यह संस्थान न केवल इलाज बल्कि जागरूकता, स्क्रीनिंग और अनुसंधान के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रहा है।

विश्व कैंसर दिवस पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर संस्थान में जन-जागरूकता रैली एवं मैराथन का आयोजन किया गया। इसके साथ ही प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निःशुल्क कैंसर जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रमों का उद्देश्य कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के प्रति समाज को जागरूक करना रहा है।
आधुनिक तकनीक से सुसज्जित उपचार सुविधाएँ
संस्थान में आज कैंसर इलाज की सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं ,जिसमे रेडिएशन थेरेपी, IMRT, IGRT, VMAT, ब्रेकीथेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, पैलिएटिव केयर, कैंसर सर्जरी और बाल्य एवं शिशु कैंसर केयर जैसी सेवाएँ पूरी तरह निःशुल्क दी जा रही हैं। यह सुविधाएँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हो रही हैं।
आंकड़े बताते हैं बढ़ती जिम्मेदारी
वर्ष 2003 में जहाँ नए कैंसर मरीजों की संख्या 1601 थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर लगभग 3500–4000 तक पहुँच गई है। फॉलो-अप मरीजों की संख्या भी अब ढाई से तीन लाख प्रतिवर्ष तक पहुँच चुकी है। रेडिएशन थेरेपी लेने वाले मरीजों की संख्या 475 से बढ़कर लगभग 25,000 प्रतिवर्ष हो गई है, जो संस्थान की बढ़ती क्षमता और विश्वास को दर्शाती है।
कीमोथेरेपी और पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट
संस्थान में सामान्य कीमोथेरेपी के साथ-साथ Nanoparticle, Pegylated और Polymer-Bound Drugs उपलब्ध हैं। वर्ष 2003 में जहाँ केवल 2055 मरीज कीमोथेरेपी लेते थे, वहीं आज यह संख्या 24,000 प्रतिवर्ष तक पहुँच चुकी है। प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार इम्यूनोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी एवं टारगेटेड थेरेपी दी जाती है।
पैलिएटिव केयर: दर्द से राहत और भावनात्मक सहारा
कैंसर के हर चरण में पैलिएटिव केयर का विशेष महत्व है। संस्थान में 30 बिस्तरों का अलग पैलिएटिव केयर वार्ड संचालित है, जहाँ दर्द प्रबंधन से लेकर भावनात्मक, सामाजिक और पारिवारिक सहयोग तक की सुविधा उपलब्ध है। मॉर्फिन जैसी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
बाल्य एवं शिशु कैंसर केयर में विशेष पहल
वर्ष 2018 से संस्थान में बाल्य एवं शिशु कैंसर के लिए अलग ओपीडी और वार्ड संचालित है। अब तक लगभग 1000 बच्चे यहाँ निःशुल्क उपचार प्राप्त कर चुके हैं, जहाँ उनके मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और सामान्य विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के अनुसार आधुनिक तकनीक और जागरूकता के माध्यम से कैंसर अब लाइलाज नहीं रहा। समय पर जांच और सही इलाज से जीवन बचाया जा सकता है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ने बताया कि कैंसर को लेकर भ्रांतियों से दूर रहना और प्रमाणिक जानकारी पर भरोसा करना ही सबसे प्रभावी उपाय है।

विश्व कैंसर दिवस विशेष – आभार एवं लेखकीय श्रेय
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, सही जानकारी पहुँचाने और व्यक्ति-केंद्रित कैंसर देखभाल की अवधारणा को सशक्त बनाने में डॉ. प्रदीप चंद्राकर, प्रोफेसर, एवं डॉ. मंजूला बेक, विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, का लेखकीय मार्गदर्शन रहा है।
डॉ. प्रदीप चंद्राकर, प्रोफेसर, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, द्वारा कैंसर की आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, तकनीकी प्रगति, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, पैलिएटिव केयर तथा समग्र कैंसर प्रबंधन पर जो वैज्ञानिक, तथ्यात्मक और जनोपयोगी जानकारी साझा की गई, वह अत्यंत मूल्यवान है। उनके अनुभव और शोध-आधारित दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट किया कि समय पर जांच, सही उपचार और निरंतर फॉलो-अप से कैंसर के खिलाफ प्रभावी लड़ाई संभव है।
डॉ. मंजूला बेक, विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, द्वारा कैंसर देखभाल में करुणा, सहानुभूति और व्यक्ति-केंद्रित उपचार पद्धति पर दिया गया मार्गदर्शन इस आलेख को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ता है। बाल्य एवं शिशु कैंसर, महिला कैंसर, पैलिएटिव केयर और मानसिक-सामाजिक सहयोग पर उनकी जानकारी ने कैंसर देखभाल के समग्र स्वरूप को उजागर किया है। इन दोनों वरिष्ठ चिकित्सकों के बहुमूल्य योगदान से यह आलेख न केवल सूचनात्मक बना, बल्कि कैंसर के प्रति आशा, विश्वास और जागरूकता का संदेश भी देता है।
