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ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस, जटिल सर्जरी से डॉक्टरों ने दी नई ज़िंदगी -छत्तीसगढ़ में स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर का पहला सफल उपचार

Healthbhaskar.com: रायपुर, 5 जनवरी 2026। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर (SCAR) जैसे अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा रोग का समय पर निदान कर जटिल सर्जरी के माध्यम से 40 वर्षीय मरीज की जान बचाई। यह छत्तीसगढ़ में इस प्रकार का पहला सफल उपचार है, जबकि विश्व मेडिकल जर्नल में अब तक ऐसे केवल 10 प्रकरण दर्ज हैं।

ब्रश करते समय अचानक बिगड़ी हालत

रायपुर निवासी 40 वर्षीय दुकानदार जब सुबह दांत साफ कर रहा था, तभी उसे गर्दन में अचानक तीव्र दर्द हुआ और देखते ही देखते सूजन बढ़ गई। कुछ ही क्षणों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन तत्काल उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञ जांच कराई गई।

सीटी एंजियोग्राफी से हुआ दुर्लभ रोग का खुलासा

गर्दन की सीटी एंजियोग्राफी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मरीज की दाईं कैरोटिड आर्टरी स्वतः फट चुकी है और आसपास कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म बन गया है। स्थिति अत्यंत नाजुक थी, इसलिए मरीज को तुरंत हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया।

उच्च जोखिम वाली सर्जरी, हर पल बना रहा खतरा

यह सर्जरी 50–60 प्रतिशत सफलता दर वाली अत्यंत जोखिमपूर्ण प्रक्रिया थी। गर्दन में अत्यधिक रक्तस्राव और थक्के के कारण धमनी की पहचान कठिन थी। ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में थक्का पहुंचने से लकवा या ब्रेन डेड होने का भी गंभीर खतरा था। सभी जोखिमों की जानकारी मरीज व परिजनों को देकर सर्जरी की सहमति प्राप्त की गई।

बोवाइन पेरिकार्डियम पैच से धमनी की मरम्मत

कई घंटे चली जटिल सर्जरी में बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की सहायता से फटी हुई कैरोटिड आर्टरी की अत्यंत सावधानीपूर्वक मरम्मत की गई। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी प्रकार का न्यूरोलॉजिकल नुकसान नहीं हुआ। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है।

क्यों है यह मामला अत्यंत दुर्लभ

आमतौर पर कैरोटिड आर्टरी रप्चर एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर, संक्रमण या ट्यूमर से ग्रस्त मरीजों में देखा जाता है। इस मामले में मरीज पूरी तरह स्वस्थ था, इसलिए स्वतः कैरोटिड आर्टरी का फटना चिकित्सा जगत में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। कैरोटिड आर्टरी गर्दन के दोनों ओर स्थित प्रमुख धमनी है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह सुनिश्चित करती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर जीवन पर तत्काल खतरा उत्पन्न हो जाता है।

संस्थान की सराहना और टीम का योगदान

इस अभूतपूर्व सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने सर्जरी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस ऑपरेशन टीम में सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ,कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू जूनियर डॉक्टर डॉ. आयुषी, डॉ. अंशिका, डॉ. ख्याति, डॉ. आकांक्षा साहू, डॉ. संजय, डॉ. ओम प्रकाश तथा नर्सिंग स्टाफ से राजेन्द्र,नरेन्द्र, चोवा, दुष्यंत, मुनेश, नुतन, प्रियंका, शीबा टेक्नीशियन टीम से भूपेन्द्र, हरीश शामिल थे।

 

 


 

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