रायपुर में COTPA-2003 पर जिलास्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन
Healthbhaskar.com: रायपुर 03 फरवरी 2026। तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए और तंबाकू नियंत्रण कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तंबाकू नियंत्रण अधिनियम (COTPA-2003) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर जिले में जिलास्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विशेष रूप से पुलिस विभाग के अधिकारियों को तंबाकू नियंत्रण कानून की विभिन्न धाराओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई और चालानी कार्रवाई को सख्ती से लागू करने पर ज़ोर दिया गया है।
तंबाकू मुक्त रायपुर की दिशा में प्रशासनिक पहल
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य रायपुर जिले को तंबाकू मुक्त जिला बनाने की दिशा में समन्वित प्रयासों को मजबूत करना था। इसमें स्पष्ट किया गया कि तंबाकू नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पुलिस, नगर निगम, शिक्षा विभाग और नागरिक समाज की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।
COTPA-2003: कानून की प्रमुख धाराओं पर विशेष फोकस
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को COTPA-2003 की महत्वपूर्ण धाराओं की व्यावहारिक जानकारी दी गई, जिनमें धारा 4: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना निषेध है। धारा 5: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर प्रतिबंध लागु हो। धारा 6A: नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध है।
धारा 6B: शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक एवं धारा 7: तंबाकू उत्पादों पर वैधानिक चेतावनी की अनिवार्यता है। इन धाराओं के अंतर्गत चालानी कार्रवाई, जुर्माना व कानूनी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
पुलिस अधिकारियों को दी गई विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को बताया गया कि तंबाकू नियंत्रण कानून के उल्लंघन पर मौके पर चालान काटना, साक्ष्य संकलन और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया कैसे की जाए। अधिकारियों को यह भी समझाया गया कि कानून के सख्त और निष्पक्ष पालन से ही समाज में तंबाकू के प्रति नकारात्मक संदेश दिया जा सकता है।
तंबाकू: एक सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट
विशेषज्ञों ने कार्यशाला में बताया कि तंबाकू सेवन न केवल कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है, बल्कि यह परिवारों की आर्थिक स्थिति और युवाओं के भविष्य को भी प्रभावित करता है। भारत में हर वर्ष लाखों मौतें तंबाकू जनित बीमारियों के कारण होती हैं, जिन्हें प्रभावी कानून प्रवर्तन से रोका जा सकता है।
शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं पर विशेष ध्यान
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि विद्यालयों और महाविद्यालयों के आसपास तंबाकू बिक्री पर सख्ती अत्यंत आवश्यक है। धारा 6B के तहत शैक्षणिक परिसरों के 100 गज के दायरे में तंबाकू विक्रेताओं पर नियमित निगरानी और कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
विभागों के बीच समन्वय पर ज़ोर
कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि तंबाकू नियंत्रण एक बहु-विभागीय जिम्मेदारी है। पुलिस विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय प्रशासन और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही कानून का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है।
जन-जागरूकता और प्रवर्तन: दोहरी रणनीति
अधिकारियों ने बताया कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ जन-जागरूकता अभियान, पोस्टर, बैनर, स्कूल कार्यक्रम और सामुदायिक संवाद के माध्यम से लोगों को तंबाकू के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है।
तंबाकू मुक्त भविष्य की ओर रायपुर
कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने तंबाकू मुक्त रायपुर के संकल्प को दोहराया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में तंबाकू नियंत्रण कानून के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिले को आदर्श तंबाकू मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
