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स्मार्ट नेव टेक्नोलॉजी से कॉक्लियर इम्प्लांट: AIIMS रायपुर ने रचा नया कीर्तिमान

Healthbhaskar.comरायपुर 16 जनवरी , 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर के ईएनटी एवं हेड एंड नेक सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए स्मार्ट नेव (Smart Nav) टेक्नोलॉजी की सहायता से पहली बार द्विपक्षीय क्रमिक (Bilateral Sequential) कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह सर्जरी जन्मजात गंभीर द्विपक्षीय श्रवण बाधिता से पीड़ित 4 वर्षीय बालिका पर की गई।

अत्याधुनिक नेविगेशन तकनीक का उपयोग

इस सर्जरी में प्रयुक्त स्मार्ट नेव टेक्नोलॉजी एक उन्नत नेविगेशन-सहायता प्राप्त प्रणाली है, जो कॉक्लियर इम्प्लांट के दौरान सर्जनों को इलेक्ट्रोड की सटीक प्लेसमेंट, बेहतर सर्जिकल नियंत्रण और वास्तविक समय (रियल-टाइम) फीडबैक प्रदान करती है। इससे सर्जरी की सटीकता बढ़ती है, ऑपरेशन का समय कम होता है और श्रवण व भाषण विकास के परिणाम अधिक बेहतर होते हैं।

विशेषज्ञ सर्जिकल टीम

इस जटिल सर्जरी को आमंत्रित अतिथि फैकल्टी डॉ. हेतल मार्फतिया, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ईएनटी, सेठ जीएसएमसी एवं केईएम अस्पताल, मुंबई तथा डॉ. रेनू राजगुरु, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ईएनटी एवं हेड नेक सर्जरी, AIIMS रायपुर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

कम ट्रॉमा, बेहतर परिणाम

स्मार्ट नेव टेक्नोलॉजी के माध्यम से इलेक्ट्रोड इंसर्शन के दौरान ट्रॉमा न्यूनतम रहता है, जिससे कॉक्लिया की संरचना सुरक्षित रहती है। इसका सीधा लाभ यह होता है कि बच्चे में सुनने और बोलने की क्षमता के विकास की संभावना अधिक हो जाती है, जो प्रारंभिक आयु में हस्तक्षेप के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

AIIMS नेतृत्व की प्रतिक्रिया

AIIMS रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), PVSM, AVSM, YSM ने इस उल्लेखनीय सफलता पर सर्जिकल टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जन्मजात श्रवण बाधिता वाले बच्चों में शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि नेविगेशन असिस्टेड कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी AIIMS रायपुर की नवीनतम तकनीक अपनाने और समुदाय को सर्वोत्तम चिकित्सा सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

बाल चिकित्सा में नई उम्मीद

यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए बाल श्रवण चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। इससे भविष्य में सुनने की समस्या से जूझ रहे कई बच्चों को बेहतर जीवन की नई दिशा मिलेगी।

 

 


 

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