Sun. Mar 15th, 2026

रायपुर में पीसीपीएनडीटी और सरोगेसी कानूनों के क्रियान्वयन पर बड़ी समीक्षा बैठक

Healthbhaskar.com: रायपुर, 14 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में बेटियों के संरक्षण और अवैध लिंग चयन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से रायपुर में राज्य पर्यवेक्षक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act 1994 पीसीपीएनडीटी एक्ट ( गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (PC&PNDT Act) भारत में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और गिरते लिंगानुपात को नियंत्रित करने के लिए बना एक सख्त कानून है। यह कानून गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड या अन्य तकनीकों के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।)

Assisted Reproductive Technology and Surrogacy Act 2021 एआरटी–सरोगेसी एक्ट (सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 का उद्देश्य भारत में बांझपन के इलाज (IVF, IUI आदि) और सरोगेसी सेवाओं को विनियमित करना है। ये कानून क्लीनिकों के लिए पंजीकरण, सरोगेट माँ के लिए कानूनी सुरक्षा, केवल परोपकारी सरोगेसी, और इच्छुक माता-पिता के लिए सख्त पात्रता मानदंडों के माध्यम से एआरटी के दुरुपयोग को रोकते हैं।) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान प्रदेश में लिंगानुपात की स्थिति, सोनोग्राफी सेवाओं की उपलब्धता, आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों की निगरानी तथा प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों को इन दोनों महत्वपूर्ण कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए ताकि भ्रूण लिंग परीक्षण और लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह रोका जा सके।

लिंगानुपात की स्थिति की गहन समीक्षा

बैठक में राज्य में जन्म के समय लिंगानुपात की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी लिंगानुपात में असंतुलन की चुनौती बनी हुई है।बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत संचालित सभी अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी केंद्रों की नियमित निगरानी की जाए। यदि कहीं भी भ्रूण के लिंग परीक्षण या उससे संबंधित किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी मिलती है तो संबंधित केंद्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि लिंग चयन जैसी प्रथाएं सामाजिक असंतुलन को बढ़ावा देती हैं और समाज में महिलाओं के प्रति असमानता को मजबूत करती हैं। ऐसे में इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

सोनोग्राफी सेवाओं की कमी दूर करने पर जोर

बैठक में यह भी सामने आया कि राज्य के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सोनोग्राफी सेवाओं की उपलब्धता सीमित है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दूर-दराज के शहरों तक जाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए छह माह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिक से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। इस प्रशिक्षण के माध्यम से डॉक्टरों को सोनोग्राफी तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी यह सुविधा उपलब्ध करा सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस पहल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी और गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।

आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों की निगरानी के निर्देश

बैठक में प्रदेश में संचालित आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों के संचालन और निगरानी को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी केंद्र एआरटी–सरोगेसी एक्ट 2021 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसमें पंजीकरण प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड का संधारण, नैतिक मानकों का पालन और मरीजों की सुरक्षा जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आईवीएफ और सरोगेसी तकनीक आधुनिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके साथ नैतिक और कानूनी पहलुओं का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज रायपुर में जल्द ही आईवीएफ सुविधा शुरू की जाएगी।इस सुविधा के शुरू होने से राज्य के उन दंपत्तियों को बड़ी राहत मिलेगी जो संतान प्राप्ति के लिए लंबे समय से उपचार की तलाश कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह सुविधा जरूरतमंद दंपत्तियों को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को भी अत्याधुनिक प्रजनन चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

महिला और शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पहल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीपीएनडीटी और एआरटी–सरोगेसी कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि इन कानूनों का सही तरीके से पालन किया जाए तो न केवल लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी बल्कि महिलाओं के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित होगा। राज्य सरकार द्वारा सोनोग्राफी सेवाओं का विस्तार, आईवीएफ सुविधा की शुरुआत और सरोगेसी केंद्रों की निगरानी जैसे कदम प्रदेश में महिला और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

 


 

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page