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एम्स रायपुर में एडवांस्ड फेटल मेडिसिन अल्ट्रासाउंड वर्कशॉप – 3डी-4डी इमेजिंग शिक्षा का नया अध्याय

Healthbhaskar.com: रायपुर, 7 नवंबर 2025 एम्स रायपुर ने विप्रो जीई हेल्थकेयर के सहयोग से उन्नत फेटल मेडिसिन अल्ट्रासाउंड वर्कशॉप (Advanced Fetal Medicine Ultrasound Workshop) का सफल आयोजन सपन्न हुआ।इस कार्यक्रम में विशेष रूप से 3डी (3D) और 4डी (4D) इमेजिंग तकनीक पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया, जो भ्रूण चिकित्सा (Fetal Medicine) के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करता है। कार्यशाला का आयोजन एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) के दूरदर्शी नेतृत्व में किया गया,जिनके निर्देशन में संस्थान चिकित्सा शिक्षा और नवाचार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहा है।

भ्रूण चिकित्सा में उत्कृष्ट पहल: डॉ. विनिता सिंह का नेतृत्व

कार्यशाला का नेतृत्व एम्स रायपुर की भ्रूण चिकित्सा सबयूनिट की प्रमुख डॉ. विनिता सिंह द्वारा किया गया। एम्स रायपुर का यह यूनिट राज्य का एकमात्र सरकारी सेटअप है जो न्यूनतम लागत पर उन्नत भ्रूण चिकित्सा और अत्याधुनिक प्रसव पूर्व (Invasive Prenatal) प्रक्रियाएँ उपलब्ध कराता है। यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के गर्भवती मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है।

डॉ. सिंह ने बताया की यह कार्यशाला केवल तकनीकी प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आने वाले डॉक्टरों को भ्रूण जीवन की बारीकियों को समझने का एक सजीव मंच प्रदान करती है। 3डी और 4डी तकनीक के माध्यम से भ्रूण के विकास को देखने और संभावित असामान्यताओं को समय रहते पहचानने की क्षमता को बढाती है।

डॉ. गिरीश पटेल की उपस्थिति ने बढ़ाई कार्यशाला की गरिमा

कार्यक्रम में देश के विख्यात भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गिरीश पटेल की उपस्थिति ने इसे और विशिष्ट बना दिया। उन्होंने आधुनिक इमेजिंग तकनीकों पर विस्तृत व्याख्यान दिया और प्रतिभागियों के साथ केस-आधारित चर्चा हुयी। भारत में भ्रूण चिकित्सा तेजी से आगे बढ़ रही है। एम्स रायपुर जैसे संस्थान इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हैं।

लाइव अल्ट्रासाउंड सत्र बना आकर्षण का केंद्र

कार्यशाला का सबसे खास हिस्सा लाइव अल्ट्रासाउंड प्रदर्शन सत्र (Live Demonstration Session) था, जिसे डॉ. विनिता सिंह ने स्वयं संचालित किया। इस सत्र में सामान्य और असामान्य भ्रूण स्थितियों के वास्तविक उदाहरण दिखाए गए। तथा कुल 120 से अधिक प्रतिभागियों ने इन सत्रों से ज्ञान लाभ प्राप्त किया,जिनमें रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ (Obstetricians), और प्रशिक्षु फेटल मेडिसिन डॉक्टर शामिल थे। कार्यशाला में 17 रोगियों ने स्वेच्छा से अपनी भागीदारी दी, जिन पर लाइव स्कैनिंग का प्रदर्शन किया गया।

सफल आयोजन के पीछे समर्पित टीम का योगदान

कार्यशाला के सफल संचालन में भ्रूण चिकित्सा टीम के सदस्यों का विशेष योगदान रहा जिसमे डॉ. अतिया रज़ा, डॉ. श्रेया पांडा, डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. राखी सचदेव, डॉ. लावण्या गुरुबेल्ली और डॉ. मनोज शामिल थे। इन सभी ने कार्यक्रम के शैक्षणिक और तकनीकी पहलुओं को कुशलता से संभाला, जिससे यह आयोजन संपन्न हुआ। एम्स रायपुर प्रशासन ने विप्रो जीई हेल्थकेयर टीम, अतिथि विशेषज्ञों और सभी प्रतिभागियों का आभार जताते हुए कहा कि यह कार्यशाला संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार और करुणामय स्वास्थ्य सेवा के प्रति समर्पण को पुनः स्थापित करती है।

3डी-4डी तकनीक — आधुनिक चिकित्सा का भविष्य

3डी और 4डी अल्ट्रासाउंड इमेजिंग (3D/4D Ultrasound Imaging) तकनीक भ्रूण की संरचना, विकास और असामान्यताओं को रियल टाइम विज़ुअलाइज़ेशन (Real-Time Visualization) के माध्यम से दिखाती है। यह तकनीक न केवल मातृ स्वास्थ्य देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, बल्कि नवजात शिशुओं में जन्मजात विकृतियों (Congenital Anomalies) के प्रारंभिक निदान को भी सशक्त बना रही है। एम्स रायपुर की यह पहल फेटल मेडिसिन ट्रेनिंग (Fetal Medicine Training) में राज्य का पहला बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में चिकित्सा छात्रों और विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण के नए अवसर प्रदान करेगी।

शिक्षा और सेवा का संगम

कार्यशाला न केवल शिक्षण-प्रशिक्षण का मंच थी, बल्कि यह ‘सीखो और सेवा करो’ (Learn and Serve) की भावना को भी मूर्त रूप देती है। डॉ. विनिता सिंह और उनकी टीम ने दिखाया कि तकनीक और संवेदना के मेल से चिकित्सा क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ जैसे उभरते राज्य में फेटल मेडिसिन सबयूनिट (Fetal Medicine Subunit) का इतना सक्रिय होना एक प्रेरक उदाहरण है,जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

एम्स रायपुर — शिक्षा, नवाचार और सेवा का केंद्र

2012 में स्थापित एम्स रायपुर (AIIMS Raipur) आज देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहाँ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक स्वास्थ्य सेवा का त्रिवेणी संगम देखने को मिलता है। इस वर्कशॉप ने एक बार फिर सिद्ध किया कि एम्स रायपुर न केवल उपचार का, बल्कि ज्ञान और नवाचार का भी केंद्र (Hub of Innovation and Learning) बन चुका है।

एम्स रायपुर ने इस कार्यशाला के माध्यम से दिखाया कि चिकित्सा शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीक, अनुभव और मानवीय संवेदना का मिश्रण है। फेटल मेडिसिन में 3डी-4डी इमेजिंग शिक्षा का यह मील का पत्थर राज्य और देश दोनों के लिए गौरव का विषय है। एम्स रायपुर की यह पहल निश्चित रूप से आने वाले समय में उन्नत मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवा (Maternal & Fetal Health Services) के क्षेत्र में नई संभावनाएँ तराशने में मदद मिलेगी।

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