Sat. Apr 25th, 2026

तीन साल से स्थिर वेतन, बढ़ती जिम्मेदारी—डॉक्टरों में नाराज़गी

Healthbhaskar.com: रायपुर ,24 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां सतह पर सब सामान्य दिखता है, लेकिन भीतर गहरी बेचैनी पनप रही है। यह बेचैनी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि उस पूरे चिकित्सक समुदाय की है, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना जाता है। पीजी डॉक्टर, बॉन्डेड डॉक्टर और सुपर स्पेशलिस्ट तीनों वर्गों के भीतर बढ़ती असंतुष्टि अब धीरे-धीरे अपनी मांगो को लेकर आंदोलन करने का संकेत दे रही है। यह स्थिति केवल वेतन या भत्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक नीतिगत संकट की ओर इशारा करती है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने बताया की कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

मूल समस्या: बढ़ती जिम्मेदारी, स्थिर आय

राज्य में पिछले तीन वर्षों से पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड और बॉन्डेड डॉक्टरों के वेतन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। इस दौरान महंगाई दर लगातार बढ़ी है, मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है और चिकित्सा सेवाओं का दबाव भी कई गुना बढ़ चुका है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि उनकी आय और कार्यभार के बीच संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। एक पीजी डॉक्टर, जो दिन-रात अस्पताल में सेवाएं देता है, उसे मिलने वाला स्टाइपेंड उसकी मेहनत और जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। यही स्थिति बॉन्डेड डॉक्टरों की भी है, जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बीच काम कर रहे हैं।

सुपर स्पेशलिस्ट कैडर का अभाव: सबसे बड़ी चुनौती- डॉ. हीरा सिंह लोधी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन

डॉ. हीरा सिंह लोधी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने बताया की छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे गंभीर समस्या सुपर स्पेशलिटी कैडर का अभाव है। देश के कई अन्य राज्यों में डीएम, एमसीएच और डीआरएनबी डिग्रीधारी डॉक्टरों के लिए अलग कैडर, बेहतर वेतनमान और स्पष्ट करियर ग्रोथ संरचना उपलब्ध है। लेकिन छत्तीसगढ़ में स्थिति इसके उलट है। यहां सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को सामान्य स्पेशलिस्ट के बराबर वेतन और पद पर काम करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी विशेषज्ञता का सही उपयोग नहीं हो पाता, बल्कि उनके मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति लंबे समय में “ब्रेन ड्रेन” को बढ़ावा देती है, जहां प्रतिभाशाली डॉक्टर बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा: डॉक्टरों के कंधों पर बोझ

ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर और भी चुनौतीपूर्ण है। यहां कार्यरत बॉन्डेड डॉक्टर सीमित संसाधनों, स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को संभाल रहे हैं। कई स्थानों पर एक ही डॉक्टर को ओपीडी, इमरजेंसी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला वेतन और सुविधाएं उनके कार्य के अनुरूप नहीं हैं। इससे उनके भीतर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

नीतिगत असंतुलन और प्रशासनिक उदासीनता

डॉ. हीरा सिंह लोधी ने बताया कि उनकी समस्याओं को बार-बार उठाने के बावजूद ठोस निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। इससे यह संदेश जाता है कि उनकी चिंताओं को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।वर्तमान संकट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नीतिगत असंतुलन का परिणाम है। स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक योजना और स्पष्ट नीति का अभाव इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने अपनी प्रमुख मांगे रखीं हैं जिनमे, पीजी स्टाइपेंड में वृद्धि , बॉन्डेड डॉक्टरों के वेतन में संशोधन, सुपर स्पेशलिटी कैडर का गठन ,स्पष्ट करियर ग्रोथ नीति , यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो न केवल डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होगी। फेडरेशन के अध्यक्ष ने बताया की यह आंदोलन किसी टकराव का नहीं, बल्कि सुधार का संकेत है। डॉक्टर बेहतर वेतन के साथ-साथ सम्मान, स्थिरता और कार्य के अनुरूप पहचान की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति सरकार के लिए एक अवसर भी है, जहां वह स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार कर एक मजबूत और टिकाऊ व्यवस्था स्थापित कर सकती है।

समय पर निर्णय ही समाधान- डॉ. रेशम सिंह ,अध्यक्ष जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन

डॉ. रेशम सिंह ,अध्यक्ष जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने बताया की आज छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यदि डॉक्टरों की आवाज को समय रहते सुना गया, तो यह संकट एक अवसर में बदल सकता है। लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में इसका असर व्यापक और गंभीर हो सकता है। स्वास्थ्य व्यवस्था केवल इमारतों और उपकरणों से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और संतोष से चलती है। इसलिए यह आवश्यक है कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

 


 

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page