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मरीजों को बड़ी राहत: निजी अस्पतालों की फार्मेसी से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं, बोर्ड लगाना होगा जरूरी

Healthbhaskar.com:  रायपुर 03 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ राज्य में निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को अपनी ही फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतों पर अब सख्त कार्रवाई की गई है। औषधि नियंत्रक विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह आदेश मरीजों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अस्पतालों को लगाना होगा सूचना बोर्ड

औषधि नियंत्रक के आदेश के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों को अपने परिसर में स्पष्ट और पठनीय सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें यह लिखा होगा कि मरीज अपनी दवाइयाँ किसी भी अधिकृत मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। यह निर्देश मरीजों को मानसिक, आर्थिक और चिकित्सकीय शोषण से बचाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

बोर्ड न लगाने पर होगी सख्त कार्रवाई

विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अस्पताल इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया या बोर्ड नहीं लगाता है, तो उसके खिलाफ औषधि एवं चिकित्सा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस निलंबन, जुर्माना और अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं। यह निर्णय स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

मरीज हित में ऐतिहासिक फैसला

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि निजी अस्पतालों की फार्मेसी से महंगी दवाएं खरीदने की मजबूरी के कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। अब मरीज सस्ती और जनऔषधि विकल्पों का चयन कर सकेंगे, जिससे इलाज की कुल लागत में कमी आएगी।

न्यायालय के निर्देशों की झलक

सूत्रों के अनुसार, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व निर्देशों की भावना के अनुरूप है, जिनमें मरीजों को दवा खरीदने की स्वतंत्रता देने पर जोर दिया गया था। औषधि नियंत्रक विभाग ने साफ किया है कि स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय नहीं बल्कि सेवा है और इसमें मरीजों के अधिकार सर्वोपरि हैं।

स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की दिशा

यह कदम राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार और मरीज-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे न केवल दवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

 


 

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