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HIMSR में प्रशासनिक संकट से मेडिकल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित, डीएमए इंडिया ने हस्तक्षेप की मांग की

Healthbhaskar.com: नई दिल्ली, 2 फरवरी। हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च (HIMSR), नई दिल्ली में जारी गंभीर प्रशासनिक और शासन संकट ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को लगभग ठप कर दिया है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन ,DMA डीएमए इंडिया ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि संस्थान में चल रहा आंतरिक संघर्ष सीधे तौर पर सैकड़ों मेडिकल छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।

नीट से चयनित छात्रों पर शासन संकट की मार

डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार द्वारा संयुक्त रूप से जारी पत्र में कहा गया है कि HIMSR में अध्ययनरत सभी छात्र नीट आधारित वैध काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश लेकर आए हैं। इसके बावजूद हमदर्द नेशनल फाउंडेशन के आंतरिक विवादों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।

37 डॉक्टरों के इस्तीफे से शिक्षण और क्लिनिकल प्रशिक्षण प्रभावित

डीएमए इंडिया के अनुसार, अगस्त 2024 से संस्थान में शैक्षणिक अव्यवस्था लगातार बनी हुई है। अब तक लगभग 37 चिकित्सकों के इस्तीफे हो चुके हैं, जिसके कारण न केवल कक्षा शिक्षण, बल्कि क्लिनिकल ट्रेनिंग और रोगी सेवाएँ भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। यह स्थिति मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील शैक्षणिक संस्थान के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

150 MBBS और पीजी सीटों की वापसी से संकट और गहराया

डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने बताया कि स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब सितंबर 2025 में 150 एमबीबीएस एवं स्नातकोत्तर सीटों की वापसी कर दी गई। इसके साथ ही सम्बद्धता के लिए सहमति न मिलने के कारण नए दाखिलों पर भी संकट खड़ा हो गया। डीएमए इंडिया ने इसे मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार बताया है।

बार-बार परीक्षाएं टलने से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अक्टूबर 2025 से परीक्षाओं का लगातार स्थगित होना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रगति और भविष्य के पंजीकरण को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। अनिश्चितता और तनाव के इस माहौल में छात्र न तो पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं और न ही अपने करियर को लेकर आश्वस्त महसूस कर रहे हैं।

छात्र सत्ता संघर्ष का शिकार नहीं बन सकते : डीएमए इंडिया

डीएमए इंडिया के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेडिकल छात्रों को आंतरिक सत्ता संघर्ष का शिकार नहीं बनाया जा सकता है। प्रशासनिक विफलता की कीमत छात्रों से वसूलना पूर्णतः अस्वीकार्य है। डीएमए इंडिया ने इस संकट से निपटने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं, जिसमे शासन और प्रशासनिक विवाद को समाप्त या निष्प्रभावी करने हेतु तत्काल नियामक हस्तक्षेप करें। 150 एमबीबीएस एवं प्रभावित पीजी सीटों की अविलंब बहाली हो। निश्चित परीक्षा तिथियाँ, समयबद्ध परिणाम और निर्बाध शिक्षण-प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। डीएमए इंडिया कड़े शब्दों कहा है कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट न केवल HIMSR बल्कि देश की मेडिकल शिक्षा प्रणाली और सैकड़ों छात्रों के भविष्य को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।

 


 

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