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NEET PG माइनस 40 कट-ऑफ चिकित्सा जगत का काला अध्याय : डॉ. कुलदीप सोलंकी

Healthbhaskar.comरायपुर 19 जनवरी , 2026। देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर NMC को तत्काल भंग करने की मांग की है।

NEET PG माइनस 40 कट-ऑफ पर तीखी प्रतिक्रिया

सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने NEET PG परीक्षा की कट-ऑफ को घटाकर माइनस (-40) करने के निर्णय को चिकित्सा जगत के लिए एक “काला अध्याय” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल मेडिकल शिक्षा की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि भविष्य में कम योग्य विशेषज्ञों के माध्यम से आम नागरिकों के जीवन को भी गंभीर खतरे में डाल सकता है।

योग्यता (Merit) के साथ खुला खिलवाड़

राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका में डॉ. सोलंकी ने उल्लेख किया कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन वर्तमान नीतियाँ इसके ठीक विपरीत दिशा में जाती प्रतीत होती हैं।
कट-ऑफ को शून्य से भी नीचे ले जाना योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया का उपहास है और इससे विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की पूरी अवधारणा ही कमजोर होती है।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की प्रमुख मांगें

सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने पत्र में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति से निम्नलिखित बिंदुओं पर हस्तक्षेप की अपील की है ,

  • NMC अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत केंद्र सरकार अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए आयोग को तत्काल भंग करे।
  • आरोप है कि NMC गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करने के बजाय निजी मेडिकल संस्थानों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है।
  • जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक प्रख्यात शिक्षाविदों और ईमानदार स्वास्थ्य पेशेवरों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
  • गलत नीतियों के कारण प्रतिभा पलायन (Brain Drain) बढ़ रहा है, जिससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है।

चिकित्सा पेशे की पवित्रता पर खतरा

डॉ. कुलदीप सोलंकी ने अपने बयान में कहा कि विशेषज्ञ (Specialist) का खिताब केवल पंजीकरण से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और योग्यता से मिलना चाहिए। मौजूदा नीतियां चिकित्सा पेशे की पवित्रता को नष्ट कर रही हैं। सिविल सोसाइटी ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि NMC फैकल्टी की कमी, बुनियादी ढांचे के विकास और प्रशिक्षण गुणवत्ता जैसे मूलभूत मुद्दों को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है। अब इस मांग के बाद केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर चिकित्सा जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

                                                                                                              ADVT.

 


 

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