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आईआईटी इंदौर में ‘दिशा 2.0’ पुरस्कार समारोह में एम्स रायपुर की उल्लेखनीय उपलब्धि

Healthbhaskar.com: रायपुर, 10 जनवरी 2026। देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में शामिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। आईआईटी इंदौर में आयोजित ‘दिशा 2.0’ पुरस्कार समारोह के दौरान एम्स रायपुर ने आईआईटीआई–दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन की प्रतिष्ठित दिशा 2.0 पहल के अंतर्गत 09 परियोजना अनुदान प्राप्त कर अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी-संचालित स्वास्थ्य समाधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता एम्स रायपुर के तेज़ी से उभरते अनुसंधान नेतृत्व और अंतःविषय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है।

अत्यधिक प्रतिस्पर्धा में एम्स रायपुर की मजबूत उपस्थिति

देशभर से प्राप्त 286 आवेदनों के अत्यंत प्रतिस्पर्धी समूह में से केवल 29 परियोजनाओं और 21 स्टार्टअप्स को वित्त पोषण के लिए चयनित किया गया। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि लगभग 1.3 करोड़ रुपये की कुल परियोजना राशि में से 09 परियोजनाएं एम्स रायपुर के संकाय सदस्यों को प्राप्त हुईं। यह उपलब्धि न केवल संस्थान की अनुसंधान गुणवत्ता को प्रमाणित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि एम्स रायपुर देश में तकनीक-आधारित हेल्थकेयर समाधान विकसित करने वाले अग्रणी संस्थानों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

इन परियोजनाओं में एम्स रायपुर के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के संकाय सदस्य शामिल हैं, जो संस्थान के मजबूत अंतःविषय (Interdisciplinary) अनुसंधान मॉडल को रेखांकित करता है। चिकित्सा विज्ञान को इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल हेल्थ से जोड़ने की यह क्षमता एम्स रायपुर को अन्य संस्थानों से अलग बनाती है।

गरिमामय समारोह और विशिष्ट उपस्थिति

‘दिशा 2.0’ पुरस्कार समारोह का आयोजन आईआईटी इंदौर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स रायपुर, तथा प्रो. सुहास एस. जोशी, अध्यक्ष, निदेशक मंडल, आईआईटीआई–दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन एवं निदेशक, आईआईटी इंदौर, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

चिकित्सा अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के समन्वय पर ज़ोर

अपने मुख्य भाषण में लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने चिकित्सा अनुसंधान को उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के साथ समन्वित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक हेल्थकेयर चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब चिकित्सा ज्ञान, तकनीकी नवाचार और प्रभावी कार्यान्वयन एक साथ आगे बढ़ें।

उन्होंने युवा डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तनकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि रचनात्मक सोच को अनुशासित और मेहनती कार्यान्वयन के साथ जोड़ना आवश्यक है, ताकि शोध का वास्तविक सामाजिक प्रभाव दिखाई दे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनुसंधान का उद्देश्य केवल वाणिज्यिक लाभ नहीं, बल्कि लोक कल्याण और समाज पर सकारात्मक प्रभाव होना चाहिए।

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सहयोगात्मक अनुसंधान से सशक्त होता हेल्थकेयर पारिस्थितिकी तंत्र

लेफ्टिनेंट जनरल जिंदल ने प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और तकनीकी मंचों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की पहलें भारत के हेल्थकेयर पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और नवाचार-सक्षम बनाएंगी।

इंटरैक्टिव सत्र में ज्ञान का आदान-प्रदान

कार्यक्रम के दौरान आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में आईआईटी इंदौर के संकाय एवं छात्र, अन्य संस्थानों के प्रतिभागियों के साथ एम्स रायपुर के संकाय सदस्यों से सीधे संवाद में जुड़े। इस सत्र में परियोजना विकास, नैदानिक अनुवाद (Clinical Translation) और प्रौद्योगिकी एकीकरण से जुड़े प्रश्नों पर गहन चर्चा हुई। एम्स रायपुर की टीम ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह बताया कि किस प्रकार प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को मरीजों तक पहुंचाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां अपनाई जाती हैं। यह संवाद न केवल शैक्षणिक विनिमय को बढ़ावा देने वाला रहा, बल्कि भविष्य के सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए भी नई संभावनाएं खोलता नजर आया।

अत्याधुनिक तकनीक का लाइव प्रदर्शन

कार्यक्रम के एक विशेष सत्र में प्रतिभागियों को चरक डीटी में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के लाइव डेमोंस्ट्रेशन का अवसर भी मिला। यहां दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन के अंतर्गत विकसित कई नवोन्मेषी उद्यमों का प्रदर्शन किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि किस प्रकार तकनीक आधारित समाधान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

एम्स रायपुर के चयनित संकाय सदस्य

दिशा 2.0 परियोजना अनुदान प्राप्त करने वाले एम्स रायपुर के संकाय सदस्यों में डॉ. रेणु राजगुरु, डॉ. चंदन डे, डॉ. सुनील जोंधले, डॉ. पुगाझेंथन थंगारजू, डॉ. सुप्रवा पटेल, डॉ. निघाट हुसैन, डॉ. नमन अग्रवाल ,डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी की टीम से,डॉ. लक्ष्मीकांत चौधरी ,डॉ. अदिति चन्द्रकर शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य रोग निदान, उपचार, डिजिटल हेल्थ और क्लिनिकल इनोवेशन के क्षेत्र में व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।

राष्ट्रीय स्तर पर एम्स रायपुर की सशक्त पहचान

दिशा 2.0 जैसी पहल में एम्स रायपुर की यह सफलता दर्शाती है कि संस्थान केवल चिकित्सा शिक्षा और उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय नवाचार मिशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

 


 

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