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प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ से मासूम अरमान को जन्मजात हृदय रोग से मिली नई ज़िंदगी

Healthbhaskar.com: रायपुर, 7  जनवरी 2026। आपके बच्चे की धड़कन बाकी बच्चों से तेज है ..गांव की मितानिन का यह वाक्य आज भी श्रीमती रजनी यादव के कानों में गूंजता है। भावुक होते हुए वे कहती हैं, तब हमने इसे सामान्य समझा, आज लगता है काश उसी वक्त ध्यान दिया होता। यह कहानी गोगांव, रायपुर के एक साधारण परिवार की है, जहां एक समय पर की गई चिकित्सकीय जांच ने एक मासूम की ज़िंदगी बचा ली।

गोगांव निवासी श्रीमती रजनी यादव के तीसरे पुत्र अरमान का बचपन सामान्य बच्चों की तरह ही बीत रहा था। दोस्तों संग खेलना, दौड़ना और हंसना सब कुछ सामान्य प्रतीत होता था। केवल बार-बार होने वाला सर्दी-बुखार माता-पिता को चिंतित करता था, लेकिन किसी गंभीर बीमारी का अंदेशा नहीं था। फिर 13 दिसंबर 2025 को सरोरा स्थित शासकीय स्कूल में चिरायु टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान अरमान की हृदय धड़कन असामान्य पाई गई। यही वह क्षण था, जिसने पूरे परिवार की ज़िंदगी की दिशा बदल दी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर संचालित प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ के अंतर्गत बच्चों में जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) की समय पर पहचान और निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। चिरायु टीम ने तत्परता दिखाते हुए अरमान को श्री सत्य साईं नारायण अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया गया। विस्तृत जांच में सामने आया कि अरमान के दिल में 18 मिमी का छेद है, जिसके लिए तत्काल सर्जरी आवश्यक थी। ईंट-भट्ठे में काम करने वाले पिता रंगनाथ यादव के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी।

संवेदनशील शासन की मिसाल: प्रोजेक्ट धड़कन ने बचाई एक मासूम जान

आर्थिक असमर्थता के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और प्रशासन व चिकित्सा टीम पर भरोसा किया। 28 दिसंबर 2025 को जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ के तहत विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों ने अरमान की जटिल हृदय सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क और सफलतापूर्वक की। कुछ दिनों की सतत निगरानी और चिकित्सकीय देखभाल के बाद अरमान को स्वस्थ अवस्था में घर भेज दिया गया। आज अरमान फिर से दोस्तों संग पिट्टूल खेलता है, दौड़ता है और मुस्कुराता है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार है और वह पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहा है। चिरायु टीम द्वारा नियमित फॉलो-अप जारी है।

भावुक होकर मां रजनी यादव कहती हैं, अगर समय पर जांच और इलाज नहीं मिलता, तो शायद आज मेरा बच्चा मेरे सामने न होता। वहीं पिता रंगनाथ यादव कहते हैं, मेरे पास न पैसे थे, न साधन, लेकिन प्रोजेक्ट धड़कन ने मेरे बेटे को नई ज़िंदगी दी। यह कहानी केवल एक बच्चे के बचने की नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मिसाल है, जिसने एक मासूम दिल को फिर से धड़कने का अवसर दिया।

 


 

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