रायपुर के चिकित्सक डॉ. कुलदीप सोलंकी का स्वर्ण मंदिर में सम्मान, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय स्मृति को मिला वैश्विक मंच
Healthbhaskar.com: रायपुर | 16 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ की सामाजिक–स्वास्थ्य चेतना को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले रायपुर के चिकित्सक एवं छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी को अमृतसर स्थित पवित्र स्वर्ण मंदिर परिसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी एसजीपीसी द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सिख इतिहास के महान बलिदानों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए संचालित दीर्घकालिक जनअभियान के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. कुलदीप सोलंकी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने मुगलों के अत्याचारों के विरुद्ध धर्म की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों की वीरता, त्याग और बलिदान को सम्मान देने हेतु “वीर बाल दिवस” को शासकीय आयोजन के रूप में मनाने की मांग को एक सशक्त जनआंदोलन का स्वरूप दिया था। इस अभियान के अंतर्गत शासन की स्वीकृति मिलने तक निरंतर सामाजिक, बौद्धिक और संवैधानिक प्रयास डॉ. कुलदीप सोलंकी द्वारा किये गए।
मेडिकल जर्नलिज़्म के दृष्टिकोण से यह पहल समाज के मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक मूल्यों और सामुदायिक चेतना से सीधे जुड़ी मानी जाती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों के अनुसार, ऐतिहासिक बलिदानों की संस्थागत मान्यता से समाज में सकारात्मक मूल्य, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव जनस्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता पर पड़ता है।
“वीर बाल दिवस” जनआंदोलन के सूत्रधार डॉ. कुलदीप सोलंकी

विदित हो कि वर्ष 2020 में डॉ. सोलंकी ने भारत सरकार से चार साहिबजादों के सम्मान में “वीर बाल दिवस” मनाए जाने की मांग की शुरुआत की थी। इसके लिए सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया तथा केंद्र सरकार के समक्ष तथ्यों, ऐतिहासिक संदर्भों और प्रस्तावों को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस क्रम में सैकड़ों नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह को प्रेषित किए गए।
डॉ. सोलंकी के सतत प्रयासों और व्यापक जनसमर्थन का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि भारत सरकार ने 9 जनवरी 2022 को प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही भारत सरकार ने इसे अपने गजट में प्रकाशित कर आधिकारिक मान्यता प्रदान की। स्वर्ण मंदिर परिसर में मिला यह सम्मान सामाजिक सेवा, चिकित्सा नैतिकता और राष्ट्रीय स्मृति के समन्वय का प्रतीक माना जा रहा है।
