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अम्बेडकर अस्पताल में संविधान दिवस का प्रेरक समारोह—एकता, न्याय और देशभक्ति का सशक्त संदेश

Healthbhaskar.com: रायपुर, 27 नवंबर 2025। संविधान दिवस के अवसर पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के प्रांगण में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने देशभक्ति, संवैधानिक चेतना, सामाजिक दायित्व और एकता के वास्तविक अर्थ को जीवंत कर दिया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत के संविधान की आत्मा को महसूस करने तथा बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संघर्ष को नमन करने और नागरिक कर्तव्यों को पुनः स्मरण करने का एक ऐतिहासिक, भावनात्मक और प्रेरक क्षण था।

बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण—संविधान की आत्मा को महसूस करने का क्षण

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह की गरिमामयी वातावरण में बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। यह क्षण पूरे परिसर के लिए गर्व और कृतज्ञता का प्रतीक बन गया। प्रतिमा के सामने खड़े सभी छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की आँखों में केवल सम्मान ही नहीं बल्कि यह विश्वास भी झलक रहा था कि एक व्यक्ति के विचार पूरे राष्ट्र को दिशा दे सकते हैं। बाबा साहब का यही योगदान आज भी सभी को समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

पोस्टर प्रतियोगिता—संविधान के रंगों में सजा कूची और कल्पनाओं का संसार

संविधान के मूल्यों पर आधारित पोस्टर प्रतियोगिता कार्यक्रम का सशक्त और रचनात्मक आकर्षण रहा। रंगों, रेखाओं और प्रतीकों की भाषा में विद्यार्थियों ने सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानव अधिकारों को अद्भुत कलात्मक रूप दिया। कई पोस्टरों में बाबा साहब का संघर्ष दिखा, कुछ में आधुनिक भारत की चुनौतियाँ, तो कुछ में एक संवेदनशील तथा मजबूत राष्ट्र की परिकल्पना को पोस्टर प्रतियोगिता द्वारा दर्शाया गया। हर पोस्टर एक केवल एक ही संदेश देखने को मिला जिसमे संविधान केवल शब्द नहीं, बल्कि भविष्य की राह दिखाने वाला प्रकाशस्तंभ है।

स्पीच प्रतियोगिता—युवा चिकित्सकों की आवाज़ में संवैधानिक जागरूकता

कार्यक्रम में स्पीच प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने सभी प्रतिभागियों को बौद्धिक ऊर्जा से भर दिया। प्रतिभागियों ने संविधान की शक्ति, नागरिक जिम्मेदारियों, आधुनिक समाज की जरूरतों, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक संवेदनशीलता पर अपने प्रभावशाली विचार अपने- अपने प्रस्तुत किए। कुछ भाषण इतने गहरे और भावनात्मक थे कि सभागार में पूर्ण सन्नाटा छा गया ,मानो जैसे हर शब्द अंतत आत्मा को छू रहा हो। कार्यक्रम में मौज़ूद MBBS और PG के ये युवा विद्यार्थियों की सजगता को देख के यह साबित हो रहा था की वो भविष्य के डॉक्टर ही नहीं, बल्कि संविधान सजग नागरिक भी हैं।

कविता प्रतियोगिता—संवेदनाओं में बसी देशभक्ति और लोकतांत्रिक चेतना

कार्यक्रम में कविता प्रतियोगिता ने वातावरण को भावनात्मक और प्रेरक बना दिया। कई कविताओं में देशभक्ति की तीव्रता, कुछ में संविधान के प्रति गर्व, और कुछ में बाबा साहब के संघर्ष की ज्वाला की कहानी को महसूस किया। कार्य्रक्रम में एक विद्यार्थी की पंक्तियाँ पूरे सभागार में गूँज उठीं “हम भारत के नागरिक, संविधान के रक्षक, हम ही भविष्य, हम ही शक्ति, हम ही राष्ट्र के सच्चे संरक्षक।” शब्दों द्वारा सदन को जोश से भर दिया।

युवा डॉक्टरों व JDA की सक्रिय भागीदारी—स्वास्थ्य सेवा और संविधान का संगम

कार्यक्रम में MBBS, इंटरन्स, PG विद्यार्थियों और Junior Doctors’ Association के सदस्यों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर यह दिखा दिया कि डॉक्टरों का कर्तव्य केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं है। उनका दायित्व समाज, मानवता और संविधान के प्रति डॉक्टर की भूमिका एक संवेदनशील सेतु जैसी होती है। आज की युवा पीढ़ी ने यह संदेश दिया की हम स्वस्थ भारत -संविधान भारत का निर्माण करेंगे।

संविधान पर व्याख्यान—स्वास्थ्य सेवाएँ और संविधान का अंतर्संबंध

अस्पताल व कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों और फैकल्टी सदस्यों ने संविधान की महत्ता, सामाजिक न्याय और चिकित्सा सेवा के नैतिक मूल्यों पर महत्वपूर्ण विचार साझा करते हुए बताया की “स्वास्थ्य सेवा और संविधान दोनों ही जनता की भलाई के लिए बने हैं। डॉक्टर इन दोनों का दायित्व निभाने वाले महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

प्रतियोगिता परिणाम और सामूहिक संकल्प—संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ

कार्यक्रम के समापन पर विजेताओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सभी छात्रों, चिकित्सकों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और यह संकल्प लिया की हम संविधान के आदर्शों को जीवन में उतारेंगे और भारत को अधिक मजबूत, न्याय-संगत और समानता आधारित राष्ट्र का निर्माण करेंगे। यह आयोजन भारत के हर नागरिक के लिए एक प्रेरणा थी। तथा यह याद दिलाने वाला क्षण था कि भारत का संविधान केवल किताब में लिखे शब्द नहीं, बल्कि हमारी पहचान, शक्ति और एकता का आधार है।

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