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बाल दिवस पर विशेष — डॉ. पल्लवी, केयर एंड क्योर डेंटल क्लिनिक, रायपुर द्वारा बच्चों के दाँतों की देखभाल पर उपयोगी सलाह

Healthbhaskar.com: रायपुर, 7 नवंबर 2025 हर साल 14 नवंबर, भारत में बाल दिवस (Children’s Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन केवल बच्चों के अधिकारों और खुशियों का प्रतीक मात्र नहीं है,बल्कि उनके स्वास्थ्य, विशेषकर मौखिक स्वच्छता (Oral Hygiene) की ओर ध्यान देने का भी अवसर है। बच्चों की मुस्कान (Smile) केवल चेहरा नहीं सजाती है। वह उनके आत्मविश्वास की पहली झलक होती है।

डॉ. पल्लवी, जो कि रायपुर स्थित केयर एंड क्योर डेंटल क्लिनिक (Care & Cure Dental Clinic) की संचालिका और प्रसिद्ध कॉस्मेटिक डेंटल सर्जन (Cosmetic Dental Surgeon) हैं। डॉ. पल्लवी से हेल्थ भास्कर डॉट कॉम की विशेष चर्चा में बताया की बच्चों की स्वस्थ मुस्कान उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का संकेत होती है। दाँतों की सही देखभाल बचपन से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि यही आदतें आगे चलकर स्वस्थ दाँतों की नींव बनती हैं।

बच्चों में पायी जाने वाली सर्वाधिक दंत समस्याएँ

  • कैविटी (Cavity) – मीठे खाद्य पदार्थों और जंक फूड से दाँतों में सड़न।
  • दूध के दाँतों का समय से पहले गिरना (Premature Loss of Milk Teeth) – इससे स्थायी दाँतों की पंक्ति बिगड़ सकती है।
  • टेढ़े-मेढ़े दाँत (Malalignment) – गलत दंत विकास या अंगूठा चूसने की आदत से।
  • मसूड़ों में सूजन (Gingivitis) – गलत ब्रशिंग तकनीक या अनियमित सफाई से।
  • दाँतों में दर्द और सेंसिटिविटी (Tooth Sensitivity) – अत्यधिक ठंडे या मीठे पदार्थों के सेवन से।

समाधान

  • बच्चों को दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डालें – सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले।
  • तीन साल से ऊपर के बच्चों के लिए मटर के दाने जितना टूथपेस्ट पर्याप्त है।
  • हर 6 महीने में एक बार डेंटल चेकअप करवाएँ।
  • मीठा खाने के बाद मुँह धोने की आदत डालें।
  • टूथब्रश हर 3 महीने में बदलें और सही ब्रशिंग तकनीक सिखाएँ।

डॉ. पल्लवी बताती हैं की बच्चों को ब्रश करना एक मजेदार सेशन की तरह सिखाएँ। उनके साथ मिलकर ब्रश करें और उनकी तारीफ करें। इससे बच्चों की आदतें जल्दी बनती हैं। दूध के दाँत ही स्थायी दाँतों के लिए मार्गदर्शक होते हैं। अगर वे समय से पहले गिर जाएँ, तो भविष्य में दंत संरचना (Dental Alignment) बिगड़ सकती है। अधिक चॉकलेट्स ,स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड का सेवन भी ओरल हेल्थ के लिए हानिकारक हैं।

डॉ. पल्लवी बताती हैं की अधिकांश पेरेंट्स यह मानते है की छोटे बच्चों को ब्रश की जरूरत नहीं होती है ,पर दाँत आते ही उसकी सफाई बहुत जरूरी होती है, वरना Early Childhood Caries का खतरा बढ़ता है। छोटे बच्चों के दाँत आमतौर पर 6 महीने की उम्र में निकलते है। बच्चे दिन में औसतन 400 बार मुस्कुराते हैं, जबकि बड़े सिर्फ़ 20 बार मुस्कुराते है। मुस्कुराने से चेहरे की 17 मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं। यह सबसे बेहतरीन व्यायाम है। दूध के दाँतों की कुल संख्या 20 होती है,जबकि स्थायी दाँत 32 होते हैं।

छोटे दाँत, बड़ी जिम्मेदारी

डॉ. पल्लवी बताती हैं की अधिकांश माता-पिता यह सोचकर बच्चों के दाँतों की अनदेखी करते हैं कि दूध के दाँत तो वैसे भी गिर जाएँगे।लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर दाँतों के टेढ़ेपन, इंफेक्शन और दर्द का कारण बनती है। बचपन में डेंटल केयर की आदत डालना न केवल स्वस्थ दाँतों की गारंटी देता है, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी भी बनाता है।डॉ. पल्लवी कहती हैं बच्चे की मुस्कान उसका आत्मविश्वास बनाती है। जब उसका चेहरा बेफिक्र मुस्कराता है, तभी उसका मन खुलकर सीखने और आगे बढ़ने को प्रेरित होता है।

माता-पिता के लिए सुझाव

डॉ. पल्लवी बताती हैं की बच्चों को खुद से ब्रश करने दें, परंतु उनकी निगरानी करें। दाँतों की सफाई को खेल की तरह मजेदार बनाएं। टीवी देखते हुए या गाने सुनते हुए “2 मिनट ब्रशिंग” रूटीन बनाएं। बच्चे के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट (Fluoride Toothpaste) का निगरानी में उपयोग करें। डेंटल विज़िट्स (Dental Visits) को डर नहीं, बल्कि एक “Health Adventure” की तरह पेश करें।

स्वस्थ दाँत, चमकती मुस्कान और स्वस्थ भविष्य

डॉ. पल्लवी ने अंत में कहा की इस बाल दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम अपने बच्चों को “स्वच्छ दाँत, स्वस्थ जीवन” की ओर प्रेरित करेंगे। एक स्वस्थ मुस्कान न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और खुशहाल भविष्य की पहचान है। इस बाल दिवस पर अपने बच्चों को डेंटल केयर से संबधित अच्छी आदतों का नया तोहफ़ा दें ,क्योंकि बच्चों की मुस्कान में ही उनका आत्मविश्वास छिपा होता है।

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