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संवेदनशीलता और तकनीक का संगम : गर्भवती महिला को मौत के मुंह से खींच लाए डॉक्टर

Healthbhaskar.com: रायपुर, 17 फरवरी 2026। महिला के जीवन में गर्भावस्था को जीवन का सबसे सुखद और भावनात्मक पड़ाव माना जाता है, लेकिन कई बार यही क्षण गंभीर चिकित्सकीय संकट में बदल जाता है। ऐसा ही एक हृदय विदारक और चुनौतीपूर्ण मामला रायगढ़ जिले से सामने आया, जहाँ 23 वर्षीय प्रथम गर्भवती महिला पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट जैसी जानलेवा स्थिति में पहुँच गई। समय पर निर्णय, अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और अनुभवी डॉक्टरों की सूझबूझ से महिला को नया जीवन मिला है।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज की तत्परता ने रचा इतिहास

यह जीवनरक्षक उपचार स्व. श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ में संभव हुआ है। 02 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे अत्यंत गंभीर अवस्था में महिला को निजी अस्पताल से रेफर कर आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। महिला को प्री-एक्लेम्पसिया (गंभीर उच्च रक्तचाप), सांस लेने में तकलीफ और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत थी। प्राथमिक जांच में पल्मोनरी एडीमा (फेफड़ों में पानी भरना) की पुष्टि हुई, जो गर्भावस्था के दौरान अत्यंत घातक स्थिति मानी जाती है।

आपातकालीन सिजेरियन और अचानक कार्डियक अरेस्ट

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन (LSCS) का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान ही महिला को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट हो गया, जिससे पूरे ऑपरेशन थिएटर में कुछ क्षणों के लिए तनावपूर्ण सन्नाटा छा गया।

उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर से लौटी धड़कन

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मसीह लकड़ा के नेतृत्व में टीम ने तुरंत उच्च प्रणाली सीपीआर शुरू किया। समन्वित प्रयासों, सटीक तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया से मरीज की हृदयगति पुनः बहाल की गई। इसके बाद महिला को वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में स्थानांतरित किया गया।

आईसीयू में तीन दिन की कड़ी निगरानी

मरीज को लगभग तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। गहन निगरानी, नियंत्रित दवाइयाँ और सतत चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के चलते महिला की हालत में लगातार सुधार होता गया। 12 फरवरी 2026 को उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया।

सफल इलाज के बाद मिली घर लौटने की अनुमति

चिकित्सकों की निरंतर मेहनत और समर्पण के चलते महिला की हालत पूरी तरह स्थिर हो गई। अंततः सफल उपचार के बाद महिला को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इस उपलब्धि ने न केवल परिवार को राहत दी बल्कि पूरे अस्पताल स्टाफ को गौरव की अनुभूति कराई।

इन विशेषज्ञों की रही अहम भूमिका

इस जटिल चिकित्सा प्रक्रिया में डॉ. टी.के. साहू, डॉ. चंद्रभानु पैंकरा, डॉ. अशोक सिंह सिदार, डॉ. लेश पटेल, डॉ. अनीश, डॉ. लक्ष्मी यादव, डॉ. अमित भोई, डॉ. सुभाष राज एवं ऑपरेशन थिएटर स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

समय पर पहचान ही बचाती है जीवन : डॉ. एम.के. मिंज 

अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. मिंज ने कहा कि यह सफलता, त्वरित निर्णय, उन्नत तकनीक और बहु-विषयक टीमवर्क का परिणाम है। यह घटना सिद्ध करती है कि यदि उच्च जोखिम गर्भावस्था में समय पर विशेषज्ञ देखरेख मिले, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

 


 

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