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बायोमेडिकल वेस्ट शुल्क पर बवाल : छोटे क्लिनिक को राहत की मांग

Healthbhaskar.com: रायपुर,01 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है। बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन शुल्क को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन IMA और संबंधित एजेंसियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अंतर्विभागीय समिति की बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्ट रूप से छोटे क्लिनिकों पर लगाए जा रहे शुल्क को अनुचित बताते हुए इसे समाप्त करने और मौजूदा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

छोटे क्लिनिक पर आर्थिक दबाव का मुद्दा

बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि छोटे क्लिनिक, डेंटल क्लिनिक और फिजियोथेरेपी सेंटर में बायोमेडिकल कचरे का उत्पादन बहुत सीमित मात्रा में होता है। इसके बावजूद इन संस्थानों पर भारी शुल्क लगाया जा रहा है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, यह व्यवस्था छोटे स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए असमान और अव्यावहारिक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. अनूप वर्मा ने स्पष्ट कहा कि छोटे क्लिनिकों को बायोमेडिकल वेस्ट शुल्क से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के मरीजों को सेवाएं दे सकें।

बिस्तरों के आधार पर शुल्क वसूली पर सवाल

वर्तमान में अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट शुल्क उनकी कुल बिस्तर क्षमता के आधार पर लिया जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस व्यवस्था पर भी गंभीर आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि अधिकांश अस्पतालों में औसतन 30 से 40 प्रतिशत बिस्तर ही उपयोग में रहते हैं, ऐसे में पूर्ण क्षमता के आधार पर शुल्क लेना तर्कसंगत नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि शुल्क निर्धारण का आधार वास्तविक कचरे की मात्रा (किलोग्राम) होना चाहिए। इससे प्रणाली अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बन सकेगी।

मोनोपोली खत्म करने की मांग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बैठक में एक और बड़ा मुद्दा उठाया गया है, जिसमे बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन में एक ही एजेंसी की मोनोपोली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि वर्तमान में एकल एजेंसी के कारण सेवा गुणवत्ता और लागत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कम से कम तीन अन्य एजेंसियों को भी रायपुर संभाग में कार्य करने की अनुमति दी जाए। इससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।

चिकित्सकों पर अविश्वास पर आपत्ति- डॉ. कुलदीप सोलंकी

बैठक के दौरान एजेंसी प्रतिनिधियों द्वारा यह आशंका जताई गई कि यदि शुल्क कचरे के वजन के आधार पर तय किया गया तो कुछ संस्थान कम वजन दिखा सकते हैं। इस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रायपुर के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि चिकित्सकों पर इस प्रकार का अविश्वास उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर समुदाय हमेशा नियमों का पालन करता है और पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन करता है।

व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन एक संवेदनशील विषय है, जो सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। यदि इस क्षेत्र में पारदर्शिता और संतुलन नहीं रखा गया तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि वे किसी भी तरह की पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली का समर्थन करते हैं, लेकिन अनावश्यक आर्थिक बोझ को स्वीकार नहीं करेंगे।

सरकार के सामने चुनौती

राज्य सरकार के लिए यह मामला संतुलन बनाने की चुनौती बन गया है। एक ओर बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य संस्थानों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव को भी कम करना आवश्यक है। यदि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो इससे छोटे क्लिनिकों को बड़ी राहत मिल सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बेहतर हो सकती है।

 


 

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