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पीजी मेडिकल शिक्षा महंगी, एडवांस ट्रेनिंग के नाम पर नियमों की अनदेखी, निजी मेडिकल कॉलेजों पर उठे सवाल

Healthbhaskar.com: रायपुर, 6 जनवरी 2026। विदेश से एमबीबीएस (FMGE) उत्तीर्ण कर देश लौटे डॉक्टरों के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल शिक्षा अब और महंगी होती जा रही है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा फीस नियमन के दावे के बावजूद निजी मेडिकल कॉलेज एडवांस ट्रेनिंग  के नाम पर छात्रों से लगभग 6 लाख रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। यह मुद्दा अब मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता और समान अवसरों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

फीस निर्धारण के बावजूद बढ़ी वसूली

सूत्रों के अनुसार, फीस विनियामक समिति ने निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए पीजी पाठ्यक्रमों की फीस तय कर दी है। इसके बाद भी कई कॉलेजों द्वारा क्लिनिकल विषयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों से एडवांस ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और अन्य सुविधाओं के नाम पर अतिरिक्त राशि ली जा रही है। छात्रों का कहना है कि यदि वे यह शुल्क नहीं देते, तो उन्हें परीक्षा और प्रशिक्षण में असुविधा का सामना करना पड़ता है।

एफएमजीई पास डॉक्टरों पर अधिक दबाव

विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर एफएमजीई परीक्षा पास करने वाले डॉक्टर पहले ही लंबी प्रक्रिया और कठिन परीक्षा से गुजरते हैं। अब पीजी में प्रवेश के समय उन पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। कई छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन मौखिक रूप से अतिरिक्त शुल्क की मांग करता है, जिससे लिखित शिकायत करना कठिन हो जाता है। चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों के विरुद्ध है। एनएमसी का स्पष्ट निर्देश है कि निर्धारित फीस के अतिरिक्त कोई भी शुल्क अनिवार्य रूप से नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद एडवांस ट्रेनिंग के नाम पर की जा रही वसूली से नियमों की अनदेखी सामने आ रही है।

एनएमसी के निर्देशों के बावजूद निजी कॉलेजों की मनमानी फीस  – डॉ. रेशम सिंह अध्यक्ष JDA

डॉ. रेशम सिंह अध्यक्ष JDA ने बताया की फीस विनियामक आयोग द्वारा तय की गयी राशि के आलावा अतिरिक्त राशि नहीं ली जा सकती है। पीजी प्रवेश लेने वाले कुछ छात्रों द्वारा इस तरह की समस्या बताई गयी है। इस संबध में संचनालय स्तर पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया की अगर मेडिकल शिक्षा को केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित कर दिया जाये तो इसका सीधा असर भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।

 

 


 

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