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कार्डियक अरेस्ट के बीच MMI नारायणा हॉस्पिटल की अभूतपूर्व सफलता 48 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन

Healthbhaskar.com: रायपुर,13 अगस्त 2025 रायपुर के एमएमआई नारायणा अस्पताल में एक ऐसा चिकित्सा चमत्कार देखने को मिला, जिसने न केवल डॉक्टरों की विशेषज्ञता बल्कि उनके साहस और टीमवर्क की मिसाल भी पेश की। अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील गौनियाल और उनकी टीम ने एक 48 वर्षीय महिला को मौत के मुंह से खींचकर बाहर निकाल लिया। महिला अचानक हुए हार्ट अटैक और उसके बाद आए कार्डियक अरेस्ट से जूझ रही थीं। यह महिला किसी भी ज्ञात हृदय रोग या जोखिम कारक के बिना थीं। उन्हें एक घंटे से सीने में तेज दर्द हो रहा था, जिसके बाद परिजन तुरंत उन्हें एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के आपातकालीन विभाग (ER) लेकर आए। प्रारंभिक जांच में एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (Acute Myocardial Infarction) यानी तीव्र हार्ट अटैक की पुष्टि हुई।

कार्डियक अरेस्ट — सबसे गंभीर और जानलेवा मोड़

उपचार शुरू होने से पहले ही महिला को कार्डियक अरेस्ट हो गया। यह वह स्थिति होती है, जब दिल पूरी तरह से धड़कना बंद कर देता है और शरीर में रक्त प्रवाह रुक जाता है। कार्डियक अरेस्ट के कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क और अंगों को स्थायी क्षति हो सकती है। टीम ने तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) शुरू किया ,जिसमें छाती पर निरंतर दबाव देना और इलेक्ट्रिक शॉक (Defibrillation) शामिल है। लगभग 30 मिनट तक लगातार CPR के बावजूद महिला का दिल धड़कना शुरू नहीं हुआ।

CPR के दौरान आपातकालीन एंजियोप्लास्टी

ऐसे कठिन समय में, डॉ. सुनील गौनियाल और उनकी टीम ने एक दुर्लभ व अत्यंत जोखिमभरा निर्णय लिया। उन्होंने तय किया कि CPR जारी रहते हुए महिला को कैथ लैब में ले जाकर आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की जाएगी। आम तौर पर एंजियोप्लास्टी एक स्थिर रोगी पर की जाती है, लेकिन जब रोगी का दिल धड़क नहीं रहा हो, तब यह प्रक्रिया अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जटिल हो जाती है। टीम ने अद्भुत समन्वय (Coordination) के साथ CPR और एंजियोप्लास्टी एकसाथ जारी रखी।

धमनी खुलते ही दिल ने धड़कना शुरू किया

कैथ लैब में पहुंचने के कुछ ही मिनटों में, अवरुद्ध धमनी को सफलतापूर्वक खोला गया। और जैसे ही रक्त प्रवाह बहाल हुआ, महिला का दिल फिर से धड़कने लगा। यह पल न केवल डॉक्टरों के लिए राहत का था, बल्कि अस्पताल के हर सदस्य के लिए गर्व का क्षण बन गया। इसके बाद महिला को तुरंत ICU में शिफ्ट किया गया। मात्र दो घंटे बाद महिला को होश आ गया और अगले ही दिन वेंटिलेटर से हटा दिया गया। पांच दिन के भीतर, बिना किसी अंग को नुकसान पहुंचे, उन्हें पूरी तरह स्वस्थ स्थिति में छुट्टी दे दी गई।

डॉ. सुनील गौनियाल ने हेल्थ भास्कर डॉट कॉम से विशेष चर्चा में बताया की यह हमारे करियर का अब तक का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण मामला था। CPR के दौरान एंजियोप्लास्टी करना बेहद कठिन है और इसमें ER तथा कैथ लैब टीमों के बीच सम्पूर्ण तालमेल की आवश्यकता होती है। ऐसे परिणाम न केवल हमारी टीम की तत्परता दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि संगठित इमरजेंसी सिस्टम कितनी बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. राकेश चाँद (सीनियर कंसल्टेंट एवं HOD अनेस्थेसियोलॉजी), डॉ. धर्मेश लाड (कंसल्टेंट अनेस्थेसियोलॉजी) और डॉ. अजीतेश रॉय (जूनियर कंसल्टेंट इमरजेंसी मेडिसिन) का धन्यवाद किया।

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजित बेल्लमकोंडा ने बताया की हमारा अस्पताल कार्डियक इमरजेंसी में क्षेत्र का अग्रणी केंद्र है। हमारे पास 24×7 कैथ लैब और PCI-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो हर समय जीवन-रक्षक हृदय उपचार के लिए तैयार रहता है। यह मामला हमारी टीम की क्षमता और समर्पण का जीवंत प्रमाण है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि हार्ट अटैक के लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, पसीना आना, चक्कर आना ये सभी संकेत हो सकते हैं। यदि मरीज को तुरंत PCI-सक्षम अस्पताल पहुंचाया जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कार्डियक अरेस्ट के दौरान समय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हर मिनट देरी मस्तिष्क और शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए CPR प्रशिक्षण और त्वरित अस्पताल पहुंचना जरूरी है। एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर की यह सफलता चिकित्सा जगत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह दर्शाता है कि सही तकनीक, सही समय पर लिया गया निर्णय और समर्पित टीमवर्क मिलकर असंभव को संभव बना सकते हैं।

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