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दिल और मधुमेह की बढ़ती बीमारियों ने बढ़ाई दवाओं की मांग, 2026 तक ट्रेंड जारी रहने के संकेत

Healthbhaskar.com: रायपुर, 9 जनवरी 2026। भारत के फार्मास्युटिकल बाजार में वर्ष 2025 के दौरान हृदय रोगों से जुड़ी दवाओं (Cardiac Drugs) की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष सबसे अधिक मांग हृदय संबंधी दवाओं की रही, जबकि इसके बाद श्वसन रोगों की दवाएँ और मधुमेह (Anti-diabetes) की दवाएँ बिक्री के मामले में अग्रणी रहीं। यह प्रवृत्ति देश में बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में हो रही निरंतर वृद्धि को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) जैसे हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मामलों में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। अनियमित खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और धूम्रपान जैसी आदतें इन बीमारियों के प्रमुख कारण बनती जा रही हैं। इसी कारण हृदय संबंधी दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और यह फार्मा बाजार की दिशा तय कर रही है।

कार्डियक ड्रग्स बनीं भारत की सबसे अधिक बिकने वाली दवाएँ, बदलती जीवनशैली जिम्मेदार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 में भी कार्डियक और एंटी-डायबिटीज दवाओं की मांग में वृद्धि जारी रहने की संभावना है। बुजुर्ग आबादी में वृद्धि, शहरीकरण और समय पर स्वास्थ्य जांच की बढ़ती जागरूकता ने भी इस रुझान को मजबूत किया है। साथ ही, डॉक्टरों द्वारा लंबे समय तक चलने वाले उपचार (Long-term Therapy) की सलाह दिए जाने से दवाओं की खपत में निरंतरता बनी हुई है।

फार्मा उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, हृदय और मधुमेह की दवाओं की बढ़ती बिक्री एक ओर जहां उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है, वहीं यह जनस्वास्थ्य के लिए चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय रोकथाम, समय पर जांच, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद ज़रूरी है।

सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा यदि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर अधिक ध्यान दिया जाए, तो हृदय और मधुमेह जैसी बीमारियों के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में स्वास्थ्य नीतियों का फोकस इलाज के साथ-साथ रोकथाम पर भी होना चाहिए।

 

 


 

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