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आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर ने रचा चिकित्सा इतिहास: आठ महीनों में पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण

Healthbhaskar.com: रायपुर 02 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित आईएलएस हॉस्पिटल्स ने चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल की स्थापना के मात्र आठ महीनों के भीतर पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण कर एक नई मिसाल कायम की गई है। मई 2025 में प्रारंभ हुए इस अस्पताल ने कम समय में ही उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और विश्वसनीय ट्रांसप्लांट केयर के माध्यम से क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बना ली है।

लिविंग डोनर के माध्यम से सभी प्रत्यारोपण, मरीज और डोनर दोनों स्वस्थ

आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर में किए गए सभी किडनी प्रत्यारोपण लिविंग डोनर के माध्यम से किए गए, जिनमें पति–पत्नी, माता–पुत्र जैसे निकट पारिवारिक संबंध शामिल थे। यह न केवल चिकित्सा दक्षता का प्रमाण है, बल्कि समाज में स्वैच्छिक अंगदान की बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है।चिकित्सा गोपनीयता मानकों का पूर्ण पालन करते हुए सभी डोनर और रेसिपिएंट्स की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। वर्तमान में सभी मरीज स्वस्थ हैं और प्रत्यारोपित किडनी सामान्य रूप से कार्य कर रही है।

अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक बना सफलता का आधार

आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर में 4-बेड का समर्पित रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट, क्लास-100 ऑपरेशन थिएटर और ऑर्गन पास बॉक्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इतनी कम अवधि में पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण अस्पताल की मजबूत क्लिनिकल क्षमता और उच्च स्तरीय इंफेक्शन कंट्रोल प्रोटोकॉल को दर्शाता है।

ग्रुप सीओओ डॉ. विशाल गोयल: पेशेंट-सेंट्रिक केयर हमारी प्राथमिकता

आईएलएस हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीओओ डॉ. विशाल गोयल ने बताया कि आईएलएस समूह की ट्रांसप्लांट सेवाएँ चार मजबूत स्तंभों पर कायम है, जिसमे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञ और उत्कृष्ट उपचार परिणाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रायपुर अस्पताल ने बहुत कम समय में मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास अर्जित किया है। उल्लेखनीय है कि आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर, जीपीटी हेल्थकेयर लिमिटेड के अंतर्गत संचालित पैन-इंडिया नेटवर्क का पाँचवाँ अस्पताल है, जो एनएसई और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनी है।

सीओओ डॉ. सौरभ चोरड़िया: 250 दिनों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर के सीओओ डॉ. सौरभ चोरड़िया ने बताया कि 11 मई 2025 को शुरू हुए अस्पताल ने लगभग 250 दिनों में ही कई बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अब तक 7,000 से अधिक मरीजों को सेवाएँ, 400 से अधिक सर्जरी, 600 से अधिक कैथ लैब प्रक्रियाएँ, 340 गैस्ट्रो प्रक्रियाएँ और 1,000 से अधिक डायलिसिस सत्र पूरे किए जा चुके हैं। यह राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विशेषज्ञों की टीम ने संभाली ट्रांसप्लांट की कमान

आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर का किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम डॉ. करण सराफ (कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट फिजिशियन) के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। सर्जिकल टीम का नेतृत्व डॉ. राहुल कपूर (सीनियर कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन) कर रहे हैं। इनके साथ अनुभवी एनेस्थेटिस्ट, इंटेंसिविस्ट, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की टीम कार्यरत है।

लैप्रोस्कोपिक तकनीक से डोनर की तेज़ रिकवरी

डॉ. राहुल कपूर ने बताया कि सभी डोनर सर्जरी लैप्रोस्कोपिक (की-होल) तकनीक से की गईं, जिससे दर्द कम हुआ और डोनर की रिकवरी तेज़ रही। अधिकांश डोनर को 2–3 दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। रेसिपिएंट्स को प्रत्यारोपण के बाद समर्पित रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट में रखा गया, जहाँ तीन-स्तरीय बैरियर इंफेक्शन कंट्रोल सिस्टम अपनाया गया।

THOTA अधिनियम के तहत पूरी पारदर्शिता

सभी किडनी प्रत्यारोपण मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के प्रावधानों के अंतर्गत, अधिकृत समिति की स्वीकृति के बाद ही किए गए। यह प्रक्रिया नैतिकता, पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंगदान जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। मरीज परामर्श, शैक्षणिक कार्यक्रमों और क्यूआर-कोड आधारित सूचना केंद्रों के माध्यम से लोगों को प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

 


 

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