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छत्तीसगढ़ में मेडिकल उपलब्धि: 10 किलो से अधिक गांठ का सफल ऑपरेशन

Healthbhaskar.com: रायपुर ,12 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता का परिचय देते हुए एक जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सर्जरी विभाग द्वारा 10.36 किलोग्राम वजनी विशाल गांठ को निकालने का यह ऑपरेशन न केवल चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह उन मरीजों के लिए भी आशा की नई किरण बनकर सामने आया है, जो वर्षों से गंभीर बीमारियों से जूझते हुए निराश हो जाते हैं।

15 वर्षों की पीड़ा का अंत, चिकित्सा ने दी नई शुरुआत

यह मामला एक ऐसे मरीज से जुड़ा था, जो पिछले करीब 15 वर्षों से अपने शरीर में विकसित हो रही इस असामान्य गांठ के कारण शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रहा था। समय के साथ यह गांठ इतनी बड़ी हो गई कि उसका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। सामाजिक असहजता, शारीरिक तकलीफ और मानसिक तनाव के बीच जी रहे इस मरीज के लिए यह ऑपरेशन किसी चमत्कार से कम नहीं रहा है। डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार करते हुए न केवल तकनीकी दृष्टि से कठिन सर्जरी को अंजाम दिया, बल्कि मरीज के जीवन में नई उम्मीद भी जगाई है।

तकनीकी चुनौती के बीच टीमवर्क की मिसाल

डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के सर्जरी विभाग की प्रमुख प्रो. डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल था। इतने बड़े आकार की गांठ को निकालना केवल एक सर्जिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि धैर्य, सटीकता और टीमवर्क का संयुक्त प्रयास से सर्जरी सफल हुयी है। डॉ. मंजू सिंह बताया कि यह केवल एक मेडिकल केस नहीं था, बल्कि एक इंसान के जीवन को फिर से सामान्य बनाने का प्रयास था। ऑपरेशन के हर चरण में अत्यधिक सावधानी बरती गई। हमारी टीम ने समर्पण और विशेषज्ञता के साथ इस चुनौती को सफलता में बदला है। इस सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहयोगी कर्मियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने हर कदम पर सतर्कता और कुशलता का परिचय दिया है।

 

सरकारी अस्पतालों की क्षमता का प्रमाण

अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने इस उपलब्धि को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल न केवल सामान्य उपचार बल्कि जटिल और उच्च स्तरीय सर्जरी करने में भी पूरी तरह सक्षम हैं। डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि हमारे संस्थान की विशेषज्ञता, टीमवर्क और सेवा भावना का प्रमाण है। सबसे बड़ी खुशी यह है कि मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।

सेवा, संवेदना और विज्ञान का संगम

यह उपलब्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जब चिकित्सा सेवा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय संवेदनाएं और समर्पण का समावेश होता है, तब परिणाम केवल इलाज तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मरीज के जीवन को नई दिशा देते हैं। इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक उपचार संभव है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अब बड़े निजी अस्पतालों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नया मील का पत्थर

यह सर्जरी न केवल एक चिकित्सा उपलब्धि है, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह दर्शाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है और सरकारी संस्थान भी राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस तरह की उपलब्धियां आम जनता के विश्वास को मजबूत करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती हैं।

मरीज के जीवन में लौटी मुस्कान

ऑपरेशन के बाद मरीज के चेहरे पर आई राहत और आत्मविश्वास इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है। वर्षों की पीड़ा से मुक्ति पाने के बाद वह अब सामान्य जीवन जीने की ओर अग्रसर है। यह घटना चिकित्सा सेवा के वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाने के लक्ष्य को साकार करती है।

सर्जरी की चुनौती: हर कदम पर जोखिम, हर निर्णय अहम

इतने बड़े आकार के लिपोमा का ऑपरेशन करना किसी भी सर्जन के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इस प्रक्रिया में कई प्रकार के जोखिम शामिल होते हैं,जिसमें

  • अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना
  • महत्वपूर्ण अंगों और नसों को सुरक्षित रखना
  • लंबे समय तक एनेस्थीसिया का संतुलन बनाए रखना
  • संक्रमण का खतरा
  • पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताएं

इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सर्जरी टीम ने बेहद सूक्ष्म योजना बनाई थी। मरीज का विस्तृत क्लिनिकल मूल्यांकन, रेडियोलॉजिकल जांच, लैब टेस्ट और प्री-ऑपरेटिव तैयारी के बाद ही ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

विशेषज्ञ टीम का समर्पण: सामूहिक प्रयास से मिली सफलता

इस जटिल सर्जरी को सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मंजू सिंह और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा में सीनियर सर्जन डॉ. राजेंद्र रात्रे ,सीनियर डॉ. मयंक भूषण मिश्रा एवं सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रेक्षा जैन ने प्रमुख भूमिका निभाई है। पीजी रेजिडेंट डॉ. कृपा शंकर,डॉ.ऋषि ,डॉ. फ़तेह ,डॉ.अभिलाष का विशेष योगदान रहा है। इतने बड़े जटिल ट्यूमर के ऑपरेशन में मरीज की पूर्ण शारीरिक स्थिरता बनाये रखने हेतु तथा ऑपरेशन के दौरान प्रत्येक चरण की सतत निगरानी, एवं पोस्ट ऑपरेटिव रिकवरी को सुरक्षित दिशा में लाने में डॉ.जयललवानी एवं डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने अपना दायित्व उत्कृष्ट ढंग से निभाया है। टीम के प्रत्येक सदस्य ने अपनी भूमिका को पूरी जिम्मेदारी और दक्षता के साथ निभाई गयी है। यह सफलता केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, टीमवर्क और चिकित्सा नैतिकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

एनेस्थीसिया टीम की अहम भूमिका

इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इतने बड़े ऑपरेशन में मरीज की शारीरिक स्थिरता बनाए रखना और पूरे समय उसकी स्थिति की निगरानी करना एक बड़ी चुनौती होती है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और सतर्कता से इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया, जिससे ऑपरेशन बिना किसी बड़ी जटिलता के सफलतापूर्वक पूर्ण हो पाया है।

राष्ट्रीय और वैश्विक संदर्भ में उपलब्धि

उपलब्ध चिकित्सा साहित्य के अनुसार भारत में अब तक लगभग 8 किलोग्राम तक के लिपोमा के सफल ऑपरेशन दर्ज हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा लगभग 22 किलोग्राम तक पहुंचता है। ऐसे में 10.30 किलोग्राम वजनी लिपोमा का सफल निष्कासन छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि राज्य के सरकारी अस्पताल भी अब जटिल सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

 


 

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