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Healthbhaskar.com:  31 जुलाई 2025 अमरावती शहर में 10 वर्षीय एक लड़की को पाचन संबंधी समस्याएं होने के बाद डॉक्टरों को जांच में पता चला कि उसके पेट में लगभग आधा किलो बालों का गुच्छा जमा हो गया था। यह गुच्छा सर्जरी करके निकाला गया। डॉक्टरों ने बताया कि यह लड़की लंबे समय से बाल खाने की आदत से ग्रसित थी, जिससे उसके पेट में बालों का संग्रह होता चला गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उषा गजभिये ने बताया कि बच्ची पिछले कई महीनों से पेट दर्द, उल्टी, भूख न लगना और कमजोरी जैसी समस्याओं से पीड़ित थी। लेकिन सर्जरी के बाद अब बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है। ट्राइकोफेजिया (बाल खाने की मानसिक आदत) और ट्राइकोबेज़ोर (पेट में बालों का गुच्छा बनना) जैसी दुर्लभ स्थितियों से जुड़ा है। ट्राइकोफेजिया (Trichophagia) और ट्राइकोबेज़ोर (Trichobezoar) दो दुर्लभ लेकिन गंभीर चिकित्सकीय और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियाँ हैं, जो अक्सर एक-दूसरे से संबंधित होती हैं। ये आमतौर पर किशोरावस्था में विशेषकर अधिक देखी जाती हैं।

ट्राइकोफेजिया (Trichophagia) क्या है? क्या है मुख्य लक्षण ?

ट्राइकोफेजिया एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति बार-बार अपने बालों को चबाता है या निगल जाता है। यह आमतौर पर ट्राइकोटिलोमेनिया (Trichotillomania – बाल नोचने की आदत) से जुड़ी होती है। अपने ही बालों को मुंह में डालना, चबाना या निगल जाना,बालों को नोचकर उन्हें निगलने की प्रवृत्ति,बालों की गंध या बनावट से असामान्य रूप से आकर्षित होना इस बीमारी का मुख्य लक्षण माना जाता है।

ट्राइकोबेज़ोर (Trichobezoar) क्या है? क्या है मुख्य लक्षण ?

जब व्यक्ति बार-बार बाल निगलता है, तो ये बाल पेट में जमा होकर एक गुच्छे या गेंद का रूप ले लेते हैं, जिसे ट्राइकोबेज़ोर कहा जाता है। यह स्थिति शारीरिक रूप से खतरनाक हो सकती है। यह एक कठोर, बालों से बना गुच्छा होता है जो आमतौर पर पेट (stomach) में बनता है। अगर यह छोटी आंत तक फैल जाए तो इसे “Rapunzel Syndrome” कहा जाता है। इस बीमारी में पेट में दर्द या सूजन आना ,बार बार उल्टी, जी मिचलाना, भूख न लगना तथा पाचन संबंधी समस्याएं (गैस, कब्ज),वज़न घटना,आंतों में रुकावट होना मुख्य लक्षण माने जाते है।

यह स्थितियाँ केवल चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक संघर्षों का संकेत भी होती हैं। व्यक्ति अक्सर शर्म, अपराधबोध या अकेलेपन का अनुभव करता है। इसलिए, इन मामलों में सहानुभूति, समझ और अत्याधुनिक मेडिकल चिकित्सा प्रणाली की आवश्यकता है।

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