Fri. Mar 27th, 2026

डर नहीं, सही जानकारी से रेबीज से बचाव संभव: स्वास्थ्य विभाग की जन-जागरूकता अपील

Healthbhaskar.comरायपुर 28  जनवरी , 2026।  रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी को लेकर आमजन में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष जन-जागरूकता संदेश जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रेबीज से डरने की नहीं, सही और समय पर जानकारी अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि उचित उपचार से इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है।

कुत्ते-बिल्ली के काटने को न करें नज़रअंदाज़

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने अथवा खरोंचने की घटनाओं को हल्के में लेना गंभीर परिणाम दे सकता है। ऐसे मामलों में रेबीज संक्रमण की आशंका बनी रहती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

घाव की तुरंत सफाई करें – पहला और सबसे जरूरी कदम

रेबीज से बचाव के लिए घाव को तुरंत बहते साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना अत्यंत आवश्यक है। यह संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम करता है। विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि घाव पर मिर्च, तेल, हल्दी या कोई भी घरेलू नुस्खा न अपनाएं, क्योंकि इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

बिना देरी सरकारी अस्पताल में लें चिकित्सा सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि किसी भी पशु के काटने के बाद बिना देरी निकटतम सरकारी चिकित्सालय जाकर चिकित्सक से परामर्श लें और उनकी सलाह के अनुसार रेबीज टीकाकरण का पूरा कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करें। अधूरा इलाज जानलेवा साबित हो सकता है।

पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण भी जरूरी

रेबीज रोकथाम की कड़ी में पालतू कुत्तों और बिल्लियों का समय-समय पर टीकाकरण भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। इससे न केवल पशु सुरक्षित रहते हैं, बल्कि मानव समुदाय को भी संक्रमण से बचाया जा सकता है।

जन-स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश

स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि रेबीज पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है, बशर्ते लोग जागरूक रहें, समय पर उपचार लें और चिकित्सकीय सलाह का पालन करें। जन-सहभागिता से ही रेबीज मुक्त समाज की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।


 

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page