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चिरायु योजना से बदली नन्हे विक्रम की दुनिया: बस्तर के वनांचल से खिलखिलाती मुस्कान की नई कहानी

Healthbhaskar.com: रायपुर, 10 मार्च 2026 | छत्तीसगढ़ सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभाव अब दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बस्तर जिले के सुदूर गांव तारागांव के 6 वर्षीय बालक विक्रम कश्यप की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। जन्मजात कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एंड पेलेट) की समस्या से जूझ रहे विक्रम को राज्य की चिरायु योजना के तहत निःशुल्क उपचार मिला और अब उसकी जिंदगी में नई मुस्कान लौट आई है।

संघर्षों से भरी रही जीवन की शुरुआत

बस्तर के घने वनांचल में बसे तारागांव के एक मजदूर परिवार में जन्मे विक्रम कश्यप के लिए बचपन आसान नहीं था। जन्म से ही उसके होंठ और तालु कटे हुए थे, जिसके कारण उसे भोजन करने में कठिनाई होती थी और उसकी बोलने की क्षमता भी प्रभावित थी। इस शारीरिक समस्या ने उसके आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया। गांव के लोगों की नजर और बच्चों के बीच झिझक के कारण विक्रम अक्सर अपना चेहरा छिपाकर रहता था और खुलकर हंसना उसके लिए एक सपना बनकर रह गया था।

चिरायु दल की पहल से खुला उपचार का रास्ता

विक्रम के जीवन में बदलाव तब आया जब शासन का चिरायु स्वास्थ्य दल आंगनवाड़ी जांच के लिए तारागांव पहुंचा। जांच के दौरान टीम ने विक्रम की समस्या की पहचान की और उसके परिवार को बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया। शुरुआत में परिवार के मन में सर्जरी को लेकर कई आशंकाएं थीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों के संवेदनशील संवाद ने उन्हें उपचार के लिए तैयार कर लिया।

रायपुर में विशेषज्ञों ने किया सफल ऑपरेशन

स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में विक्रम को बेहतर इलाज के लिए राजधानी रायपुर के एक अस्पताल में ले जाया गया। विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों की टीम ने जटिल सर्जरी कर विक्रम के कटे होंठ और तालु का सफल ऑपरेशन किया। कुछ ही हफ्तों के उपचार और देखभाल के बाद विक्रम की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

अब आत्मविश्वास के साथ जी रहा है विक्रम

सफल सर्जरी के बाद जब विक्रम अपने गांव लौटा तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। जो बच्चा पहले अपना चेहरा छिपाकर चलता था, अब आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराते हुए सबके सामने आता है। अब वह साफ शब्दों में अपने पिता से बात करता है और घर के छोटे-मोटे कामों में अपनी मां का हाथ भी बंटाता है।

परिवार ने जताया सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार

विक्रम के पिता नरसिंग कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार की चिरायु योजना उनके बेटे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यदि यह योजना न होती तो उनके लिए इस तरह का महंगा इलाज संभव नहीं था।

स्वास्थ्य योजनाओं से बदल रही ग्रामीण जिंदगी

विक्रम की यह कहानी केवल एक बच्चे की मुस्कान की नहीं, बल्कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की भी कहानी है। चिरायु योजना के माध्यम से ऐसे परिवारों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा मिल रही है जो अन्य योजनाओं के तहत पात्र नहीं हैं। यह पहल गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के जीवन में नया उजाला ला रही है।

 


 

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