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सेप्टिक टैंक हादसे पर सख्त हुए मुख्यमंत्री साय, मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

Healthbhaskar.com: रायपुर, 18 मार्च 2026। राज्य में एक निजी अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में किसी भी परिस्थिति में जबरन मैनुअल स्कैवेंजिंग नहीं करवाई जाएगी और इस तरह के मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा।

राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक में सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री साय ने यह निर्देश छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में आयोजित राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए है। यह बैठक हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन के प्रतिषेध और उनके पुनर्वास से संबंधित कानून, “The Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013,हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013″ 6 दिसंबर 2013 से प्रभावी हुआ। यह कानून देश भर में मानवीय अपशिष्ट (मैला ढोने) की प्रथा को प्रतिबंधित करता है। असुरक्षित सीवर/सेप्टिक टैंक की सफाई पर रोक लगाता है, और इन श्रमिकों के पुनर्वास का प्रावधान करता है, के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित की गई थी। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सीवरेज और सेप्टिक टैंक की सफाई केवल नगर निगम या पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराई जाए। साथ ही सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

हादसे ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

निजी अस्पताल में हुई इस घटना ने कार्यस्थल सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरणों की कमी और उचित प्रोटोकॉल का पालन न होने के कारण यह हादसा हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पूरी तरह रोकी जा सकती हैं, यदि मशीनों का उपयोग किया जाए और श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

पीड़ित परिवारों को सहायता और न्याय का भरोसा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मृतकों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मानवाधिकारों के भी खिलाफ हैं।

कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान

बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने जानकारी दी कि मैनुअल स्कैवेंजिंग करवाना कानूनन अपराध है। इसके तहत दोषियों को एक वर्ष तक का कारावास या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि इस अमानवीय प्रथा का पूर्णतः उन्मूलन किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन

बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में किए गए सर्वेक्षण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में सर्वेक्षण कर यह प्रमाणित किया गया है कि प्रदेश मैनुअल स्कैवेंजिंग से मुक्त है। हालांकि, हालिया घटना ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर अभी और सख्ती की जरूरत है।

विभिन्न विभागों के समन्वय पर जोर

मुख्यमंत्री ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभाग मिलकर इस प्रथा के उन्मूलन और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

मानवीय गरिमा का मुद्दा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा संविधान के मूल्यों और मानवीय गरिमा के खिलाफ है। समाज के हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और सरकार इस अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। दुर्घटना के बाद सरकार की सख्ती यह संकेत देती है कि भविष्य में ऐसे मामलों को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्देशों का प्रभावी पालन किया गया, तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

 


 

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