छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष: स्वास्थ्य विकास की नई इबारत, चुनौतियों से जीत की कहानी
Healthbhaskar.com: रायपुर, 1 नवंबर 2025 छत्तीसगढ़ राज्य 1 नवंबर 2000 को जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तब यह नवोदित राज्य सीमित संसाधनों, कमजोर स्वास्थ्य ढांचे और विषम भौगोलिक परिस्थितियों से जूझ रहा था। जनजातीय आबादी और घने वन क्षेत्रों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच चुनौतीपूर्ण थी। परंतु आज, 25 वर्ष बाद, छत्तीसगढ़ ने “दृष्टि से जीवन शक्ति तक” की यात्रा तय की है ,जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ राज्य के कोने-कोने तक पहुँच चुकी हैं और नई स्वास्थ्य नीतियाँ विकास की धारा में निरंतर प्रगतिशील हैं।
स्वास्थ्य सेवा की नींव से विस्तार तक
राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ही एकमात्र प्रमुख चिकित्सा संस्थान था। 2001 में बिलासपुर में छत्तीसगढ़ मेडिकल इंस्टीट्यूट की स्थापना के साथ चिकित्सा शिक्षा में नई ऊर्जा का संचार हुआ। ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए, राज्य ने ग्रामीण चिकित्सा सहायकों (Rural Medical Assistants) की योजना शुरू की, जो आगे चलकर आयुष्मान भारत मिशन के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की तरह कार्य करने लगे। आज छत्तीसगढ़ में 15 राज्य प्रायोजित और 4 निजी Medical Colleges, साथ ही केंद्रीय एम्स रायपुर सहित, 2500 से अधिक MBBS और 400 से अधिक MD/MS सीटें उपलब्ध हैं। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है।
मितानिन से लेकर मातृत्व तक: जनस्वास्थ्य की रीढ़
2001 में शुरू की गई मितानिन योजना राज्य की सबसे सफल जनस्वास्थ्य पहलों में से एक है। यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर आशा कार्यकर्ता मॉडल के रूप में अपनाई गई है। मितानिनों की भूमिका ने न केवल ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाया बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को घटाने में भी निर्णायक योगदान दिया है। 2001 में शिशु मृत्यु दर (IMR) जहाँ 79 थी, वहीं 2025 में यह घटकर 32 पर आ गई है। मातृ मृत्यु दर (MMR) 379 से घटकर 160 पर पहुँचना राज्य की स्वास्थ्य नीति की सफलता का बड़ा उदाहरण है।
संस्थागत विकास और स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार
25 वर्षों में राज्य में 33 जिला अस्पताल, 150+ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), 800 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और 5000 से अधिक उपकेंद्र स्थापित हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई 108, 102 और 109 एम्बुलेंस सेवाएँ, अब डायल 112 के रूप में एकीकृत होकर आपातकालीन सेवाओं की रीढ़ बन चुकी हैं। साथ ही, सिकल सेल संस्थान और क्षेत्रीय कैंसर संस्थान रायपुर ने मध्य भारत में एक नई पहचान बनाई है। ये संस्थान छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक के मरीजों को सेवा दे रहे हैं।
चुनौतियाँ अब भी बरकरार
राज्य ने कई मील के पत्थर हासिल किए हैं, लेकिन CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन) में दवा खरीद और आपूर्ति में भ्रष्टाचार के आरोप स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रश्न खड़े करते हैं। आँख फोरवा कांड और गर्भाशय कांड जैसी घटनाएँ स्वास्थ्य नैतिकता के लिए चुनौती बनी हुई हैं। बढ़ती गैर-मान्यता प्राप्त लैब, क्लीनिक और मेडिकल स्टोर भी जनस्वास्थ्य के लिए आज भी खतरा बने हुए है। वही दूसरी ओर स्वास्थ्य शिक्षा में भी असमानता बरकरार है। मेडिकल कॉलेजों में संकाय की कमी, अस्थायी स्टाफ और असंतुलित वेतनमान जैसे मुद्दे आज भी सुधार की प्रतीक्षा में हैं।
पोषण और नवा छत्तीसगढ़ की दृष्टि
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, पाँच साल से कम उम्र के 35% बच्चे अब भी अविकसित (Stunted) हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय पोषण अनुसंधान संस्थान, रायपुर की स्थापना की दिशा में पहल की है, जो Malnutrition, Anemia और Micronutrient Deficiency जैसी समस्याओं पर शोध और नीति निर्माण में मदद करेगा।
भविष्य की दिशा -डिजिटल हेल्थ और सुपर स्पेशियलिटी
छत्तीसगढ़ के डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने राज्य में उन्नत चिकित्सा सेवाओं की नई परंपरा स्थापित की है। लेकिन भविष्य की जरूरतें बताती हैं कि और अधिक Super Specialty Doctors, Telemedicine Expansion और Digital Health Integration की आवश्यकता है। World Health Organization (WHO) की अनुशंसा के अनुसार जहाँ स्वास्थ्य बजट 5% होना चाहिए, वहीं भारत में यह अब भी 2.5 से 3% के बीच है। छत्तीसगढ़ को इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए नीति और संसाधन दोनों स्तरों पर मजबूत कदम उठाने होंगे।
जेडीए छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह एवं डॉ. अमित बंजारा ,सचिव ने खास बातचीत में बताया की बेहतर स्वास्थ्य सेवा ही बेहतर छत्तीसगढ़ की नींव है। डॉक्टरों का कल्याण, पारदर्शिता और नीति-सुधार राज्य की प्राथमिकता बननी चाहिए। डॉ. अमित बंजारा, सचिव, जेडीए छत्तीसगढ़ ने बताया की स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज नहीं, बल्कि समग्र सामाजिक न्याय का हिस्सा है। 25 वर्ष की यात्रा प्रेरणादायी है, पर अभी बहुत सफर तय करना बाकी है।
