PM-JAY में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग तेज, CGDF ने उठाई आवाज
Healthbhaskar.com: रायपुर, 23 फरवरी 2026। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत गंभीर मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन CGDF ने एक अहम मांग उठाई है। फेडरेशन ने योजना के एम्पैनलमेंट और प्रतिपूर्ति ढांचे में DM/DrNB क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को औपचारिक रूप से शामिल करने की मांग की है।
DM/DrNB क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों की भूमिका
आज के समय में जब गंभीर बीमारियाँ, दुर्घटनाएँ, हृदयाघात, स्ट्रोक, सेप्सिस, गंभीर संक्रमण और बहु-अंग विफलता जैसी स्थितियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, तब DM/DrNB क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। DM डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन और DrNB डॉक्टरेट ऑफ नेशनल बोर्ड भारत में चिकित्सा क्षेत्र की सर्वोच्च सुपर-स्पेशलिटी डिग्रियां हैं। इसमें विशेषज्ञ ऐसे प्रशिक्षित डॉक्टर होते हैं, जो आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जीवन-रक्षा, सतत निगरानी और उन्नत उपचार में दक्ष होते हैं।
सामान्य भाषा में कहें तो, जब किसी मरीज की हालत बहुत नाजुक होती है और जीवन खतरे में होता है, तब क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ अंतिम सुरक्षा कवच बनकर सामने आते हैं। उनकी मौजूदगी से इलाज अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्रभावी बनता है, जिससे मृत्यु दर में कमी आती है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट पाता है।
जन-जागरूकता के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन केवल इलाज नहीं, बल्कि जीवन बचाने की सबसे उन्नत चिकित्सा प्रणाली है। समाज और शासन को मिलकर इन विशेषज्ञों की भूमिका को पहचान देनी चाहिए, ताकि हर जरूरतमंद मरीज को समय पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने बताया कि देशभर में गंभीर एवं जीवन-घातक बीमारियों के उपचार में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी औपचारिक मान्यता से न केवल आईसीयू सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि गंभीर रोगियों की जान बचाने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाएगी।
क्रिटिकल केयर मेडिसिन: जीवन रक्षक चिकित्सा की रीढ़
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह ने बताया कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन एक तीन वर्षीय सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण है, जिसमें गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार और सतत निगरानी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उन्नत वेंटिलेशन तकनीक, हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग, सेप्सिस मैनेजमेंट, मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का उपचार और सतत रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसी अत्याधुनिक जीवन-रक्षक तकनीकों का गहन अभ्यास कराया जाता है उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, गंभीर संक्रमण, जटिल सर्जरी के बाद की स्थिति, हार्ट फेल्योर, ब्रेन स्ट्रोक और मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन जैसी परिस्थितियों में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
आईसीयू प्रबंधन में आएगा बड़ा सुधार
फोरम ऑफ़ इंडियन क्रिटिकल केयर स्पेशालिस्ट के सदस्य डॉ. प्रतीक जैन ने बताया कि प्रशिक्षित क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की उपस्थिति से आईसीयू का प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और प्रभावी बनता है। इससे मरीजों को मिलने वाले लाभ स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं,जिसमे आईसीयू में भर्ती की अवधि में कमी आ सकती है। जटिलताओं एवं मृत्यु दर में गिरावट आएगी। प्रमाण आधारित उपचार को बढ़ावा मिलेगा तथा स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा एवं महंगे और अनावश्यक इलाज पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। योजना में इन विशेषज्ञों को शामिल करने से सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार का मानकीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन का मानना है कि इस नीति परिवर्तन से राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उन्नत आईसीयू सेवाओं का विस्तार संभव होगा। इससे जिला अस्पतालों और छोटे शहरों के चिकित्सा संस्थानों में गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा और बड़े शहरों में रेफर करने की मजबूरी भी कम होगी। इसका सीधा लाभ उन मरीजों को मिलेगा जो संसाधनों की कमी के कारण समय पर बेहतर इलाज से वंचित रह जाते हैं।
सरकार के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने राज्य शासन और केंद्र सरकार के समक्ष निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं,जिनमे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में सुपर-स्पेशियलिस्ट सूची में DM/DrNB क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। आईसीयू सेवाओं हेतु प्रतिपूर्ति दरों में समुचित बढ़ोतरी की जाए। गंभीर रोगियों के लिए उन्नत आईसीयू सेवाओं को योजना के अंतर्गत प्राथमिकता दी जाए एवं जिला स्तर पर आधुनिक आईसीयू सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाए।
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मिलेगा व्यापक लाभ
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अनुसार अगर यह मांग स्वीकार की जाती है तो आयुष्मान भारत योजना और अधिक प्रभावी बनेगी। इससे न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि राज्य में साक्ष्य आधारित, मानकीकृत एवं उच्च गुणवत्ता वाली गहन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार भी संभव होगा। जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा।

