बिलासपुर में बर्ड फ्लू का कहर, 4400 मुर्गियों की मौत से हड़कंप
Healthbhaskar.com: बिलासपुर, 25 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी क्षेत्र में स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के प्रकोप ने प्रशासन और पशुपालन विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। बीते कुछ दिनों में अचानक करीब 4400 मुर्गियों की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से व्यापक कदम उठाए हैं।
घटना का पूरा घटनाक्रम: अचानक मौतों से बढ़ी चिंता
जानकारी के अनुसार, 19 से 24 मार्च के बीच कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बड़ी संख्या में मुर्गियों की अचानक मौत हुई। इस फार्म में कुल 5037 मुर्गियां मौजूद थीं, जिनमें से 4400 की मौत हो गई। पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जी.एस. तंवर ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद सैंपल भोपाल और पुणे की लैब में भेजे गए थे, जहां से बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने इसे गंभीर जैविक आपदा मानते हुए तत्काल नियंत्रण उपाय लागू किए।
10 किलोमीटर तक निगरानी: सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने दो स्तरों पर क्षेत्र को विभाजित किया है,जिसमे 1 किलोमीटर दायरा: संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है एवं 10 किलोमीटर दायरा सर्विलांस निगरानी जोन में रखा गया है। संक्रमित क्षेत्र में सभी पोल्ट्री पक्षियों, अंडों और चारे को नष्ट (कुलिंग) करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही इस क्षेत्र में पोल्ट्री गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
कलेक्टर और एसएसपी ने किया दौरा, दिए सख्त निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संक्रमण को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कंटेनमेंट जोन में आवागमन पूरी तरह नियंत्रित रखा जाए और वैज्ञानिक तरीके से सैंपलिंग, कुलिंग तथा निपटान की प्रक्रिया अपनाई जाए।
स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क, मानव संक्रमण की निगरानी
हालांकि बर्ड फ्लू मुख्यतः पक्षियों में फैलने वाली बीमारी है, लेकिन इसके कुछ मामलों में इंसानों में संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाए। विशेष रूप से पोल्ट्री फार्म से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
उठे कई गंभीर सवाल
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमे मुख्य सवाल के रूप ,क्या समय रहते संक्रमण की पहचान नहीं हो सकी? क्या बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन ठीक से नहीं हुआ? क्या विभागीय स्तर पर कोई लापरवाही हुई है ? विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें किसी बड़ी चूक का संकेत भी हो सकती हैं। अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
बर्ड फ्लू के प्रकोप का असर केवल पोल्ट्री फार्म तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव भी पड़ता है। पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है तथा अंडा और चिकन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सप्लाई में कमी आने की वजह से बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ सकता है। स्थानीय व्यापारियों और किसानों में भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों की सलाह: सावधानी ही बचाव
विशेषज्ञों ने आम लोगों को सलाह दी है कि, कच्चे या अधपके चिकन का सेवन न करें। पोल्ट्री क्षेत्र में बिना सुरक्षा के न जाएं। संक्रमित पक्षियों से दूरी बनाए रखें। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रशासन की प्राथमिकता: संक्रमण पर पूर्ण नियंत्रण
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग, सैंपलिंग और जागरूकता के माध्यम से संक्रमण को फैलने से रोका जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जैविक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत स्वास्थ्य और पशुपालन तंत्र कितना जरूरी है।
