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इट्सा हॉस्पिटल्स की बड़ी उपलब्धि, किम्स हैदराबाद के विशेषज्ञों के साथ किया जीवनरक्षक ऑपरेशन

Healthbhaskar.com: रायपुर, 10 मार्च 2026। राजधानी रायपुर के इट्सा हॉस्पिटल्स ने क्रिटिकल क्लिनिकल केयर के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करते हुए मात्र 2 किलोग्राम वजन वाले नवजात शिशु की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक कर चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। जन्म के समय ही गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित इस शिशु पर की गई सर्जरी क्षेत्र में प्रथम मानी जा रही है। इस जीवनरक्षक ऑपरेशन को इट्सा हॉस्पिटल्स, रायपुर और किम्स हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से सफल बनाया गया।

जन्म के तुरंत बाद गंभीर हृदय रोग का पता

जानकारी के अनुसार शिशु का जन्म होने के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए तुरंत इट्सा हॉस्पिटल्स के अत्याधुनिक एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया। जांच के दौरान चिकित्सकों को पता चला कि बच्चे को कोआर्क्टेशन ऑफ एओर्टा नामक गंभीर जन्मजात हृदय रोग है। इस बीमारी में हृदय से शरीर में शुद्ध रक्त पहुंचाने वाली मुख्य रक्त वाहिका एओर्टा असामान्य रूप से संकरी हो जाती है, जिससे शरीर के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। सटीक निदान के लिए बच्चे की सीटी एओर्टोग्राम जांच की गई, जिससे रोग की गंभीरता स्पष्ट हो सकी और उपचार की दिशा तय की गई।

विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने संभाली जिम्मेदारी

इस जटिल स्थिति में बच्चे का उपचार विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में शुरू किया गया। पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की जिम्मेदारी इट्सा हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. सचिन पिटलावर, बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल चौहान तथा बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना राय और उनकी टीम द्वारा संभाली गयी।निरंतर निगरानी और समन्वित उपचार से बच्चे की स्थिति स्थिर बनी रही।

किम्स हैदराबाद के कार्डियक सर्जन ने किया ऑपरेशन

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व किम्स हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के प्रसिद्ध कार्डियक सर्जन डॉ. अनिल धर्मापुरम ने किया तथा उनके साथ कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. नागराजन और पूरी कार्डियोथोरेसिक टीम मौजूद रही। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे में सीवियर कोआर्क्टेशन ऑफ एओर्टा की स्थिति थी, जिसमें एओर्टा इतनी संकरी हो चुकी थी कि यह लगभग अवरोध की स्थिति के समान थी।

पीडीए ने दी जीवन की उम्मीद

सौभाग्य से बच्चे में पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) नामक अस्थायी रक्त वाहिका खुली हुई थी, जिसके माध्यम से शरीर के निचले हिस्से तक रक्त पहुंच रहा था। इस स्थिति को डक्ट-डिपेंडेंट सर्कुलेशन कहा जाता है। सर्जरी तक इस रक्त वाहिका को खुला रखने के लिए बच्चे को प्रोस्टिन दवा का इन्फ्यूजन दिया गया, जो ऐसे मामलों में जीवनरक्षक माना जाता है।

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में की गई सर्जरी

मात्र चार दिन के नवजात और केवल 2 किलोग्राम वजन वाले बच्चे पर हृदय सर्जरी करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। इतनी कम उम्र में रक्त वाहिकाएं बेहद छोटी और नाजुक होती हैं तथा शरीर की सहनशक्ति सीमित होती है। इसके बावजूद विशेषज्ञ टीम ने लेफ्ट थोरेकोटॉमी तकनीक के माध्यम से एओर्टा के संकरे हिस्से की सफल मरम्मत कर रक्त प्रवाह को सामान्य कर दिया। सर्जरी के दौरान एओर्टिक क्रॉस क्लैम्प समय को न्यूनतम रखा गया, ताकि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह सुरक्षित बना रहे।

एनेस्थीसिया और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल रही अहम

इतने छोटे नवजात में एनेस्थीसिया देना भी एक बड़ी चुनौती होती है। ऑपरेशन के दौरान ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ऑक्सीजन स्तर को संतुलित बनाए रखना एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। सर्जरी के बाद बच्चे को इट्सा हॉस्पिटल्स के अत्याधुनिक एनआईसीयू में कड़ी निगरानी और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल के तहत रखा गया है।

अब पूरी तरह स्वस्थ है नवजात

विशेषज्ञों की देखभाल और सफल सर्जरी के बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। चिकित्सकों के अनुसार शिशु अब सामान्य रूप से माँ का दूध ले रहा है और स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि समय पर निदान, अत्याधुनिक एनआईसीयू सुविधाएं और विशेषज्ञों की समन्वित टीम के सहयोग से नवजातों में होने वाले गंभीर हृदय रोगों का सफल उपचार संभव है। इट्सा हॉस्पिटल्स ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि अब क्षेत्र में ही अत्याधुनिक नवजात और बाल हृदय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं, जो गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

 


 

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