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छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड विवाद: मरीजों और अस्पतालों के बीच खिंचाव, सरकार पर दबाव बढ़ा

Healthbhaskar.com: रायपुर, 31 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना PMJAY यानी आयुष्मान भारत को लेकर लंबे समय से उत्पन्न समस्याएं अब विरोध और असंतोष का रूप ले रही हैं। योजना के तहत गरीब और कमजोर लोगों को निःशुल्क इलाज की गारंटी देने वाली इस स्वास्थ्य सुरक्षा ढांचे में भुगतान देरी, इलाज में बाधा तथा स्वास्थ्य-सेवा प्रदाताओं और मरीजों की नाराजगी प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई है।

भुगतान बकाया, इलाज बाधित

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने वाले मरीजों को अब कैशलेस इलाज मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में निजी अस्पतालों के बकाया भुगतान में लगभग ₹1700 करोड़ से अधिक की देनदारी अटकी है, जिसके कारण कई अस्पतालों ने चेतावनी दी है कि यदि यह भुगतान जल्द न किया गया तो 1 फरवरी से योजना के तहत इलाज बंद भी कर दिया जाएगा। यह स्थिति आयुष्मान योजना के मूल उद्देश्य गरीबों के लिए मुफ्त और सुलभ इलाज को सीधे प्रभावित कर रही है।

इसी तरह कुछ बड़े अस्पतालों में मरीजों को आयुष्मान कार्ड के बावजूद इलाज से पहले नकद भुगतान करना पड़ने जैसी शिकायतें भी आई हैं। कई मरीजों ने दावा किया है कि उन्होंने योजना के तहत इलाज को भरोसे के साथ चुना था, लेकिन आयुष्मान कार्ड का उपयोग न होने के कारण उन्हें या उनके परिजनों को नकद भुगतान करना पड़ा। विशेषकर बिलासपुर और सुकमा जैसे जिलों के मरीजों ने इस तरह के अनुभवों का उल्लेख किया है।

अस्पतालों का विरोध और भुगतान संकट

छत्तीसगढ़ के करीब 1000 से अधिक निजी अस्पताल योजना के तहत इलाज की सुविधा प्रदान करते हैं, लेकिन भुगतान में लगातार देरी के कारण अस्पतालों के सामने संचालन की समस्या उत्पन्न हो गई है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की एसोसिएशन (AHPI) ने कहा है कि बिना भुगतान के कैशलेस इलाज देना असंभव है, और इससे उन्हें वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह संकट केवल अस्पताल प्रबंधन की समस्या नहीं है, बल्कि गरीब मरीजों के उपचार अधिकारों पर भी सीधा असर डाल रहा है। इस देरी के कारण अस्पताल कर्मचारियों की सैलरी, दवाओं की खरीद और आवश्यक उपकरणों की पूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

सरकार का रुख: विवाद और समाधान

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे पर कह रहे हैं कि योजना के लिए पर्याप्त फंड जारी किया जा चुका है, और जो अस्पताल इलाज नहीं कर रहे हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति लिखित में बताना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात को दोहराया है कि आयुष्मान भारत योजना को रोकना नहीं है, बल्कि भुगतान विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए।

पिछले भुगतान देरी के अन्य उदाहरण

यह कोई पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना से संबंधित विरोध और विवाद सामने आया हो। पिछले साल भी करीब ₹1500 करोड़ बकाया भुगतान के कारण कई अस्पतालों ने इलाज रोक दिया था, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हुआ था और मतभेदों के कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन IMA ने सरकार से समाधान की मांग की थी।

मरीजों के हक़ पर संकट

आयुष्मान भारत योजना का मूल उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। लेकिन भुगतान देरी, अस्पतालों का विरोध, इलाज में बाधा तथा मरीजों से नकद वसूली जैसी घटनाओं ने योजना की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि समय पर भुगतान और स्पष्ट प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई तो आयुष्मान कार्ड की प्रभावशीलता में कमी आ सकती है, जिससे दूरस्थ, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सबसे अधिक नुकसान होगा।

 


 

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