ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से पुलिस दुर्व्यवहार का आरोप: करनाल प्रकरण में डीएमए ने मुख्यमंत्री से की निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग
Healthbhaskar.com: करनाल, 10 मार्च 2026। हरियाणा के करनाल जिले में ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी चिकित्सक के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार और अवैध हिरासत के मामले ने चिकित्सा समुदाय में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन डीएमए इंडिया ने इस घटना को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए हरियाणा सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ड्यूटी के दौरान जबरन थाने ले जाने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विगत 04 मार्च 2026 की सुबह लगभग 07:00 से 08:00 बजे के बीच करनाल जिले के घरौंडा क्षेत्र में कार्यरत डॉ. प्रशांत चौहान चिकित्सा अधिकारी, HCMS-1 अस्पताल में अपनी नियमित शासकीय ड्यूटी पर मौजूद थे। आरोप है कि उसी दौरान थाना घरौंडा के एसएचओ दीपक कुमार तथा अन्य पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे और डॉ. चौहान के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें जबरन थाने ले गए।
सूत्रों के हवाले जानकारी प्राप्त हुयी है कि चिकित्सक को बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए हिरासत में रखा गया। इस दौरान परिजनों को सूचना भी नहीं दी गई और कथित रूप से दबाव बनाकर उनसे माफीनामा लिखवाने तथा कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की बात भी सामने आई है।
डीएमए ने जताई गहरी चिंता
डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार तथा राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियंशु शर्मा ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि यदि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो इससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
डीएमए पदाधिकारियों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने, निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि पीड़ित चिकित्सक को न्याय दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है आक्रोश
डॉ. अमित व्यास ने कहा कि यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो इससे देशभर के चिकित्सा समुदाय में व्यापक असंतोष पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस मामले में पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि चिकित्सकों का विश्वास कायम रह सके।
स्वतंत्र जांच की मांग
डीएमए ने मांग की है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जाए, सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और भविष्य में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। संगठन का मानना है कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।
